देहरादून

छात्रों के भविष्य की सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन

महिला मंच समेत विभिन्न संगठनों ने 17 फरवरी के समझौते के अनुपालन और वैकल्पिक शैक्षणिक व्यवस्था की उठाई मांग

देहरादून। सूरजमल विश्वविद्यालय कॉलेज ऑफ नर्सिंग, किच्छा में अध्ययनरत छात्रों के भविष्य की सुरक्षा को लेकर उत्तराखंड महिला मंच, उत्तराखंड इंसानियत मंच एवं छात्र हित समर्थक जनसंगठनों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजा। संगठनों ने जिलाधिकारी देहरादून के माध्यम से भेजे ज्ञापन में 17 फरवरी को हुए समझौते का पूर्ण अनुपालन कराने और छात्रों की पढ़ाई जारी रखने के लिए वैकल्पिक शैक्षणिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।

संगठनों का कहना है कि कॉलेज में बीएससी नर्सिंग और जीएनएम पाठ्यक्रमों की मान्यता एवं संबद्धता की स्थिति को लेकर छात्रों को पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई। इसके चलते छात्रों का शैक्षणिक एवं व्यावसायिक भविष्य अनिश्चितता में है। छात्रों द्वारा जनवरी से कॉलेज प्रबंधन के साथ समाधान को लेकर लगातार वार्ता की जा रही है। वहीं, 17 फरवरी को हुए समझौते के अनुपालन को लेकर छात्रों ने गंभीर आपत्ति जताई है।

संगठनों के अनुसार समाधान नहीं निकलने पर छात्रों ने 29 जुलाई से शांतिपूर्ण एवं अहिंसक आंदोलन शुरू किया है। संगठनों ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए शासन-प्रशासन से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

वैकल्पिक संस्थान में समायोजन की मांग

ज्ञापन में 17 फरवरी के समझौते का पूर्ण अनुपालन कराने, छात्रों को किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय अथवा संस्थान में समायोजित कर उनकी पढ़ाई जारी रखने की व्यवस्था करने की मांग की गई। इसके साथ ही छात्रों के शैक्षणिक रिकॉर्ड एवं क्रेडिट का सुरक्षित हस्तांतरण, आर्थिक एवं शैक्षणिक नुकसान की उचित क्षतिपूर्ति तथा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठाई गई।

संगठनों ने कहा कि यदि प्रवेश के समय छात्रों को पाठ्यक्रम की मान्यता अथवा संबद्धता के संबंध में गुमराह किया गया है तो जिम्मेदार व्यक्तियों एवं संस्थान के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

आंदोलनरत छात्रों की सुरक्षा की मांग

ज्ञापन में शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ किसी भी प्रकार का दमनात्मक व्यवहार नहीं करने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई। संगठनों ने कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। शासन-प्रशासन को तत्काल ठोस समाधान निकालकर छात्रों की शैक्षणिक निरंतरता और भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।

ज्ञापन देने वालों में कमला पंत, निर्मला बिष्ट, चन्द्रकला, राघवेंद्र, ईश्वर पाल शर्मा, अधिवक्ता अशोक कटारिया, पदमा गुप्ता, मंजू बलोदी, विजय नैथानी, हेमलता नेगी, किरण पुरोहित, त्रिलोचन भट्ट सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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