श्रावण सोमवार पर परमार्थ निकेतन में सेवा, साधना और करुणा का संगम
रुद्राभिषेक कर विश्व शांति की प्रार्थना, कांवड़ यात्रियों की सेवा में मेडिकल कैंप और जल मंदिर बने मानवता के केंद्र
ऋषिकेश, 10 अगस्त। श्रावण मास के दूसरे सोमवार के अवसर पर परमार्थ निकेतन में श्रद्धा, साधना और सेवा का संगम देखने को मिला। परमार्थ निकेतन में रुद्राभिषेक कर विश्व शांति की प्रार्थना की गई। वहीं कांवड़ यात्रियों की सेवा के लिए बाघखाला में संचालित मेडिकल कैंप और विभिन्न स्थानों पर लगाए गए जल मंदिरों के माध्यम से सेवा कार्य निरंतर जारी है।

परमार्थ निकेतन के अनुसार, मेडिकल कैंप में प्रतिदिन करीब दो से तीन हजार कांवड़ यात्रियों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इसके अलावा हजारों श्रद्धालुओं को जल मंदिरों के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है।
परमार्थ पीठाधीश्वर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने श्रावण सोमवार को शिव से जुड़ने और स्वयं से मिलने का पावन अवसर बताया। उन्होंने कहा कि श्रावण मन को शांत करने, चेतना को जागृत करने और भीतर के शिवत्व को अनुभव करने का दिव्य अवसर है। श्रावण की हर बूंद प्रकृति, पवित्रता और जीवन के प्रति कृतज्ञता का संदेश देती है।
उन्होंने कहा कि “शिव बाहर नहीं, भीतर हैं।” शिव को पाने के लिए कहीं दूर जाने की आवश्यकता नहीं है। व्यक्ति को कुछ क्षण ठहरकर अपने भीतर उतरने, अपनी श्वास को महसूस करने और मौन को सुनने की आवश्यकता है। जब मन शांत और श्वास सजग होती है, तब भीतर के शिवत्व का अनुभव होता है।
कांवड़ यात्रियों को मिल रही चिकित्सा सुविधा
बाघखाला स्थित परमार्थ निकेतन मेडिकल कैंप में गंगाजल लेकर पैदल यात्रा कर रहे कांवड़ यात्रियों को प्राथमिक उपचार, स्वास्थ्य जांच और आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं। लंबी पैदल यात्रा के कारण थकान, पैरों में छाले, दर्द, कमजोरी सहित अन्य सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे श्रद्धालुओं को कैंप में उपचार और आवश्यक स्वास्थ्य सहायता दी जा रही है।
चिकित्सकों, नर्सिंग टीम और स्वयंसेवकों की टीम श्रद्धालुओं की सेवा में जुटी हुई है। किसी यात्री के पैरों की मरहम-पट्टी की जा रही है तो किसी को आवश्यक दवाइयां दी जा रही हैं। थके हुए यात्रियों के लिए कुछ समय विश्राम की व्यवस्था भी की गई है, ताकि वे स्वास्थ्य लाभ लेने के बाद अपनी यात्रा दोबारा शुरू कर सकें।
परमार्थ निकेतन की ओर से श्रावण सोमवार पर रुद्राभिषेक के साथ कांवड़ यात्रियों की सेवा को भी शिव आराधना का माध्यम बनाया गया है। सेवा, साधना और करुणा के इस संगम के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आस्था के साथ मानवता और परोपकार का संदेश दिया जा रहा है।
