9 अगस्त से थलनदी में 48 घंटे के उपवास पर बैठेंगे डॉ. शक्तिशैल कपरवाण
यमकेश्वर। सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं की बदहाली, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, पलायन तथा जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक को लेकर डॉ. शक्तिशैल कपरवाण 9 अगस्त से क्रांति मैदान, थलनदी में 48 घंटे के उपवास पर बैठेंगे। उन्होंने क्षेत्र की जनता से जनसरोकारों से जुड़े इन मुद्दों को लेकर एकजुट होकर आवाज उठाने और अधिक से अधिक संख्या में थलनदी पहुंचने की अपील की है।

डॉ. कपरवाण ने कहा कि पहाड़ों में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। कई क्षेत्रों में सड़कें हैं ही नहीं और जहां सड़कें बनी हैं, उनकी हालत बदहाल है। स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं और संसाधन उपलब्ध नहीं होने के कारण ग्रामीणों को उपचार के लिए दूर-दराज के शहरों का रुख करना पड़ता है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि पहाड़ों में विद्यालयों के बंद होने तथा शिक्षा सुविधाओं के कमजोर होने से ग्रामीण क्षेत्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने कहा कि जंगली जानवरों का बढ़ता आतंक भी पहाड़ के ग्रामीणों के लिए गंभीर समस्या बन गया है। बाघ, गुलदार, बंदर और जंगली सुअर समेत अन्य वन्यजीव लगातार फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। वन्यजीवों से फसलों की बर्बादी के कारण कई ग्रामीण खेती छोड़ने को मजबूर हैं। वहीं बाघ और गुलदार के हमलों से मानव जीवन पर खतरा बना हुआ है। वन्यजीवों द्वारा लोगों और उनके पालतू पशुओं को नुकसान पहुंचाए जाने की घटनाएं ग्रामीणों में भय का माहौल पैदा कर रही हैं।
डॉ. कपरवाण ने कहा कि रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में युवा और ग्रामीण पलायन करने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं मजबूत किए बिना पहाड़ों से पलायन को रोकना संभव नहीं है। उन्होंने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी आवाज उठाते हुए कहा कि विकास योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से जनता तक पहुंचना चाहिए और जनहित के कार्यों में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने क्षेत्रवासियों से अपील की कि अन्याय और जनसमस्याओं के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करें। उन्होंने युवाओं, महिलाओं, किसानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों से 9 अगस्त को क्रांति मैदान, थलनदी पहुंचकर 48 घंटे के उपवास को समर्थन देने का आह्वान किया।
डॉ. कपरवाण ने कहा कि यह उपवास केवल उनका व्यक्तिगत संघर्ष नहीं है, बल्कि सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पलायन, भ्रष्टाचार और वन्यजीवों से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे लोगों की आवाज को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि जब तक पहाड़ की मूलभूत समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जाता, तब तक जनआंदोलन के माध्यम से जनता की आवाज उठाई जाती रहेगी।
