पौड़ी

वित्तीय समावेशन से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर जोर

पौड़ी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत विकासखंड खिर्सू में वित्तीय समावेशन अभिमुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। मुख्य विकास अधिकारी के निर्देशन में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला की अध्यक्षता खंड विकास अधिकारी शिव सिंह भंडारी ने की। कार्यशाला में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को बैंकिंग, बीमा, ऋण सुविधाओं और वित्तीय धोखाधड़ी से बचाव के संबंध में जानकारी दी गई।

कार्यशाला में सामुदायिक स्तरीय संघ (सीएलएफ) के पदाधिकारियों, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं, बैंक सखी, बीमा सखी, वित्तीय साक्षरता एवं ऋण परामर्शदाता, वित्तीय सखी, बैंक मित्र सखी, वित्तीय साक्षरता केंद्र के प्रतिनिधियों के साथ विभिन्न बैंकों, भारतीय जीवन बीमा निगम और एनआरएलएम के कार्मिकों ने प्रतिभाग किया।

वित्त समन्वयक धनंजय भट्ट ने एनआरएलएम के तहत संचालित वित्तीय समावेशन के विभिन्न घटकों, सक्षम केंद्र और लखपति दीदी योजना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वित्तीय समावेशन का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण परिवारों को बैंकिंग, बीमा सहित अन्य वित्तीय सेवाओं से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। उन्होंने महिलाओं से बैंकिंग सेवाओं का सुरक्षित एवं सही उपयोग करने, नियमित बचत की आदत विकसित करने और बीमा योजनाओं का लाभ लेने की अपील की।

उन्होंने वित्तीय एवं साइबर धोखाधड़ी से सतर्क रहने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि कार्यशाला में मिली जानकारी को स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी अन्य महिलाओं तक भी पहुंचाया जाए। उन्होंने बताया कि लखपति दीदी योजना के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

भारतीय जीवन बीमा निगम के शाखा प्रबंधक ने बीमा सखी की भूमिका और दायित्वों की जानकारी देते हुए बीमा योजनाओं के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं भारतीय स्टेट बैंक के प्रतिनिधि ने बैंकिंग सेवाओं, बैंक मित्र सखी की भूमिका, स्वयं सहायता समूहों की बैंक से संबद्धता, एनपीए, बीमा सुविधाओं तथा वित्तीय धोखाधड़ी से बचाव के उपायों की जानकारी दी।

कार्यशाला में प्रतिभागियों को सुरक्षित बैंकिंग लेनदेन, डिजिटल वित्तीय सेवाओं के सावधानीपूर्वक उपयोग तथा विभिन्न वित्तीय योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने के लिए जागरूक किया गया। इस अवसर पर बैंक प्रतिनिधि, एनआरएलएम के अधिकारी-कर्मचारी और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं मौजूद रहीं।

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