पॉलीहाउस से बढ़ेगी किसानों की आय, आधुनिक तकनीक अपनाने पर जोर
पौड़ी। किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से आरआईडीएफ-नाबार्ड के तहत पॉलीहाउस में ऑफ-सीजन सब्जी उत्पादन विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को संरक्षित खेती, ऑफ-सीजन सब्जी उत्पादन, विपणन और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण के प्रथम सत्र में कृषि विशेषज्ञ डॉ. एससी पंत ने संरक्षित खेती के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि खुले खेत में टमाटर की औसत उत्पादकता करीब 100 टन प्रति हेक्टेयर होती है, जबकि पॉलीहाउस में यह 250 से 300 टन प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकती है। पॉलीहाउस में उत्पादित सब्जियों की गुणवत्ता बेहतर होने के साथ उनकी शेल्फ लाइफ भी अधिक होती है और कीट एवं रोगों का प्रकोप अपेक्षाकृत कम रहता है। उन्होंने कहा कि संरक्षित खेती अपनाकर किसान 1.5 से 2.5 गुना तक अधिक उत्पादन हासिल कर बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
जिला उद्यान अधिकारी मनोरंजन भंडारी ने किसानों से किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) से जुड़कर उपज के बेहतर विपणन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं और विभागीय योजनाओं का लाभ लेकर फल एवं सब्जियों की गुणवत्ता तथा भंडारण अवधि बढ़ाई जा सकती है, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।
प्रशिक्षण के दूसरे सत्र में कृषि विशेषज्ञ ने ऑफ-सीजन सब्जी उत्पादन को पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों के लिए आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने संरक्षित खेती के माध्यम से अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता, उच्च बाजार मूल्य, नियंत्रित परागण, आसान पौध संरक्षण और खरपतवार नियंत्रण जैसे लाभों की जानकारी दी।
प्रगतिशील किसान महेंद्र सिंह रावत ने हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से लेट्यूस की सफल खेती और दिल्ली के बाजारों में उसके विपणन का अनुभव साझा किया। उन्होंने किसानों को चेरी टमाटर, थाइम, ओरेगैनो और बेल पेपर जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की संभावनाओं से भी अवगत कराया।
समापन सत्र में नाबार्ड के एडीएम हिमांक शर्मा ने फूलों की क्लस्टर आधारित खेती, नाबार्ड की विभिन्न योजनाओं, किसान क्रेडिट कार्ड और किसान उत्पादक संगठनों की उपयोगिता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों और सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाकर कृषि को लाभकारी उद्यम के रूप में विकसित करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में उद्यान विभाग के कर्मचारी और विभिन्न क्षेत्रों से आए किसान मौजूद रहे।
