अंकिता हत्याकांड: सीबीआई जांच की रफ्तार पर उठे सवाल, संघर्ष मंच ने मुख्यमंत्री से मांगा इस्तीफा
देहरादून। अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच ने शनिवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच की धीमी प्रगति पर सवाल उठाते हुए सरकार से मामले की प्रभावी पैरवी करने की मांग की। मंच ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इस्तीफे की भी मांग की और कहा कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए यह आवश्यक है।

मंच ने कहा कि 20 जुलाई को उच्च न्यायालय में मामले की सुनवाई प्रस्तावित है, जिसमें दोषियों की ओर से सजा कम करने और जमानत की मांग की जाएगी। संघर्ष मंच ने सरकार से आग्रह किया कि वह अदालत में मजबूती से पक्ष रखे ताकि दोषियों को किसी प्रकार की राहत न मिले।
पत्रकार वार्ता को निर्मला बिष्ट, सुजाता पॉल, मोहित डिमरी, उमा भट्ट, हरिओम पाली और विमला कोहली ने संबोधित किया।
निर्मला बिष्ट ने कहा कि सीबीआई जांच की धीमी गति गंभीर चिंता का विषय है और राज्य में रिजॉर्ट संस्कृति, नशे के कारोबार तथा महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मामलों में कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
सुजाता पॉल ने आरोप लगाया कि कथित वीआईपी एंगल से जुड़े जिन लोगों के नाम सार्वजनिक चर्चा में आए, उनसे अब तक सीबीआई द्वारा पूछताछ नहीं की गई है। उन्होंने वनंतरा रिजॉर्ट पर बुलडोजर चलाकर साक्ष्य नष्ट किए जाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच की भी मांग की।
मोहित डिमरी ने कहा कि सीबीआई जांच की घोषणा जनदबाव के बाद हुई, लेकिन छह महीने बाद भी जांच में कोई ठोस प्रगति सामने नहीं आई। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले की जांच को जानबूझकर धीमा रखा जा रहा है।
उमा भट्ट ने कहा कि 18 सितंबर को अंकिता भंडारी हत्याकांड के चार वर्ष पूरे हो जाएंगे। यदि उससे पहले सीबीआई जांच पूरी कर कथित वीआईपी एंगल पर कार्रवाई नहीं करती है, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
विमला कोहली और हरिओम पाली ने भी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामले में पूरी पारदर्शिता के साथ निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।
संघर्ष मंच ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने शुरू से ही आरोपितों को संरक्षण दिया है। मंच का कहना है कि वनंतरा रिजॉर्ट पर बुलडोजर चलाने से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए मुख्यमंत्री को पद छोड़ना चाहिए।
पत्रकार वार्ता में बड़ी संख्या में महिलाएं, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। इनमें मंजू बलोदी, पद्मा गुप्ता, विजया नैथानी, मातेश्वरी रजवार, शांता नेगी, कुंवारा देवी, कृष्णा सकलानी, त्रिलोचन भट्ट, ईश्वर शर्मा, राघवेंद्र और राजू सिंह सहित अन्य लोग शामिल थे।
