पौड़ी

मष्टखाल में गरजे डॉ. कपरवाण, बोले—स्थानीय हितों की अनदेखी नहीं होगी बर्दाश्त

द्वारीखाल (पौड़ी गढ़वाल)। मष्टखाल में डांडी कांठी मंच द्वारा क्षेत्रीय समस्याओं को लेकर जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्रवासियों ने जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक, स्वास्थ्य एवं शिक्षा सुविधाओं की कमी, बेरोजगारी, पलायन तथा लैंटाना झाड़ियों के उन्मूलन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

कार्यक्रम में वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी एवं उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के संरक्षक डॉ. शक्तिशैल कपरवाण मुख्य अतिथि तथा यूकेडी के केंद्रीय संगठन मंत्री वी.पी. भट्ट सलाणी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व सैनिक धनवीर सिंह नेगी ने की, जबकि संचालन डांडी कांठी मंच के संयोजक धर्मेंद्र सिंह बिष्ट ने किया।

संयोजक धर्मेंद्र बिष्ट ने कहा कि डॉ. शक्तिशैल कपरवाण ने छात्र जीवन से ही उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और आज भी पहाड़ के लोगों के अधिकारों के लिए संघर्षरत हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य लंबे संघर्ष और अनेक शहादतों के बाद प्राप्त हुआ है, इसलिए इसके मूल स्वरूप और हितों की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है।

जनसंवाद के दौरान वक्ताओं ने क्षेत्र में बढ़ती वन्यजीव समस्या, बेरोजगारी, पलायन और बुनियादी सुविधाओं की कमी पर चिंता व्यक्त की। शीला डांडा निवासी मनीष कुमार जागरी ने कहा कि जंगली जानवरों से तो मुकाबला किया जा सकता है, लेकिन बाहरी लोगों द्वारा लगातार जमीन खरीदने की प्रवृत्ति स्थानीय लोगों के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। उन्होंने भूमि खरीद पर नियंत्रण की मांग की।

यूकेडी नेता वी.पी. भट्ट सलाणी ने कहा कि राष्ट्रीय दलों की नीतियों के कारण मूल निवास संबंधी व्यवस्थाएं कमजोर हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में लागू की जा रही व्यवस्थाएं स्थानीय निवासियों के हितों को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में भूमि की खरीद-फरोख्त बढ़ रही है, जंगलों का दोहन हो रहा है तथा पारंपरिक खेती और पशुपालन लगातार समाप्ति की ओर बढ़ रहे हैं।

मुख्य अतिथि डॉ. शक्तिशैल कपरवाण ने कहा कि स्थानीय युवाओं को सरकारी एवं निजी क्षेत्रों में पर्याप्त रोजगार नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों में निवास करने वाले परिवारों को प्रतिमाह ग्रीन बोनस दिए जाने तथा रोजगार एवं ठेकों में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने की मांग की।

उन्होंने मष्टखाल-बाड़ियूं मोटर मार्ग पर मेवाड़ गांव के समीप लंबे समय से अधूरे पड़े कार्यों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि एक वर्ष से सड़क कटान का कार्य रुका हुआ है और निर्माण स्थल पर मशीनें खड़ी होने के बावजूद काम नहीं हो रहा है। इसे उन्होंने भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण बताया। इसके अलावा नैरुल-मंजफ, सिलोगी-बागों, चैलूसैंण-सुराड़ी, मष्टखाल-क्यार, कल्सी तथा सिलोगी-कखोना सहित कई अधूरे मोटरमार्गों का भी उल्लेख किया।

डॉ. कपरवाण ने कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच चुका है और आम नागरिक विभिन्न स्तरों पर इससे प्रभावित हो रहा है। उन्होंने क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान के लिए संगठित जनआंदोलन और जनभागीदारी को आवश्यक बताया।

कार्यक्रम में सूरजपाल सिंह रावत (अध्यक्ष, न्याय पंचायत मागथा), विनोद सिंह भंडारी, राजेश्वर दयाल सेमवाल, धीरेन्द्र नैथानी, रमेश चंद्र बलूनी, हिमांशु कोठारी, कमलेश कोठारी, सुरेश बिष्ट, राज्य आंदोलनकारी वीरेंद्र रावत, राजेंद्र नेगी, मोहनलाल, महेश बलूनी, ज्योतिराम कोठारी, सुनील बिष्ट, महाराज बिष्ट, शोभाराम कोठारी, धनबीर नेगी, आशीष बिष्ट, मथुरा प्रसाद बलूनी सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।

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