टिहरी में 79 नाली भूमि की नीलामी पर उठे सवाल, भू-कानून को लेकर सरकार पर साधा निशाना
ग्रामीणों की आजीविका से जुड़ी सामुदायिक भूमि के निजी हाथों में जाने की आशंका, निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल
टिहरी। टिहरी जनपद के बौर और रामगांव क्षेत्र की लगभग 1.572 हेक्टेयर (करीब 79 नाली) भूमि की नीलामी और आवंटन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस भूमि को वर्षों से स्थानीय ग्रामीणों और पशुपालकों द्वारा पशुओं के चारे तथा आजीविका के महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में उपयोग किया जाता रहा है। अब इसके निजी हाथों में जाने की आशंका से क्षेत्र में चिंता का माहौल है।

मामले को लेकर सरकार के भू-कानून पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। विरोध करने वालों का आरोप है कि राज्य सरकार जमीन बचाने के बजाय जमीन बेचने का काम कर रही है। उनका कहना है कि यदि सामुदायिक और सार्वजनिक उपयोग की भूमि का इस प्रकार आवंटन किया जाता रहा तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पशुपालन और पारंपरिक आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
आलोचकों ने नीलामी प्रक्रिया की शर्तों पर भी प्रश्न खड़े किए हैं। उनका कहना है कि निविदा में न तो मूल निवास और न ही स्थायी निवास को योग्यता का आधार बनाया गया है। ऐसे में बाहरी लोगों या कथित भू-माफियाओं को लाभ पहुंचाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
स्थानीय लोगों ने सरकार और प्रशासन से नीलामी प्रक्रिया की समीक्षा करने तथा ग्रामीण हितों और सामुदायिक संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। वहीं प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
