सेवा, साधना और पर्यावरण संरक्षण का संदेश लेकर शुरू हुए परमार्थ निकेतन के विशेष प्रकल्प
स्वामी चिदानन्द सरस्वती के अवतरण दिवस से पूर्व दिव्यांगता मुक्त शिविर और हरित सेवा अभियानों का शुभारम्भ
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में जून माह का आगाज सेवा, साधना और पर्यावरण संरक्षण के विविध कार्यक्रमों के साथ हुआ। पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती के पावन अवतरण दिवस से पूर्व यहां दिव्यांगता मुक्त शिविर एवं हरित सेवा प्रकल्पों का शुभारम्भ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन स्वामी चिदानन्द सरस्वती, कोलकाता से आए समाजसेवी विनोद बागरोडिया, आभा बागरोडिया तथा विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की टीम ने दीप प्रज्वलित कर किया।

परमार्थ निकेतन में 1 जून से 5 जून तक आयोजित दिव्यांगता मुक्त शिविर के माध्यम से सैकड़ों दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग, कैलिपर्स, सहायक उपकरण और चिकित्सा परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है। शिविर में विशेषज्ञ टीम लाभार्थियों की आवश्यकताओं के अनुसार उपकरणों का माप लेकर उन्हें तैयार कर रही है तथा उनके उपयोग का प्रशिक्षण भी दे रही है।
इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि आज मानवता को केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि मूल्यों, करुणा और प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व से युक्त विकास की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि समाज की वास्तविक प्रगति तब मानी जाएगी जब विकास की अंतिम किरण समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
कार्यक्रम के दौरान पौधारोपण अभियान भी चलाया गया। पौधारोपण करते हुए स्वामी जी ने कहा कि पृथ्वी केवल हमारे पूर्वजों की विरासत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की अमानत है। यदि आज प्रकृति की रक्षा नहीं की गई तो भविष्य की पीढ़ियां गंभीर संकटों का सामना करेंगी।
उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता केवल मंदिरों और आश्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति संरक्षण, जल स्रोतों की रक्षा, पीड़ितों की सहायता, महिलाओं के सम्मान और युवाओं को सही दिशा देने में भी निहित है। उन्होंने गंगा संरक्षण, पर्यावरण जागरूकता और वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति के संदेश को आगे बढ़ाने के लिए चलाए जा रहे अभियानों का भी उल्लेख किया।
महावीर सेवा सदन, कोलकाता की विशेषज्ञ टीम द्वारा अत्याधुनिक विशेष वाहन के माध्यम से ऋषिकेश और आसपास के ग्रामीण एवं पर्वतीय क्षेत्रों में पहुंचकर दिव्यांगजनों को निःशुल्क सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। शिविर में लाभार्थियों को कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके उपयोग और संतुलन संबंधी व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
परमार्थ निकेतन द्वारा शुरू किए गए ये सेवा और पर्यावरण प्रकल्प समाज को यह संदेश दे रहे हैं कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का आधार है।
