113 विद्यार्थियों को उपाधियां, शिक्षा और कौशल से राष्ट्र निर्माण का आह्वान
सिक्किम कौशल विश्वविद्यालय का प्रथम वार्षिक दीक्षांत समारोह संपन्न
नामची (सिक्किम)। Sikkim Skill University का प्रथम वार्षिक दीक्षांत समारोह सोमवार को विश्वविद्यालय परिसर में गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। समारोह में कुल 113 विद्यार्थियों को विभिन्न पाठ्यक्रमों की उपाधियां प्रदान की गईं। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों, शिक्षकों, विशिष्ट अतिथियों, अभिभावकों एवं विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति रही।

समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. वी.एन. पाण्डेय ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में केवल उपाधि प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ज्ञान, कौशल, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का समन्वय ही वास्तविक सफलता का आधार है। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है और उन्हें अपने ज्ञान एवं कौशल का उपयोग समाज एवं देश के विकास के लिए करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से आजीवन सीखने की प्रवृत्ति बनाए रखने तथा चुनौतियों को अवसर में बदलने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. (डॉ.) बिजय सिंह ने कहा कि कौशल आधारित शिक्षा आज समय की आवश्यकता बन चुकी है। विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि रोजगारोन्मुखी दक्षताओं से भी सुसज्जित कर रहा है। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने का संदेश दिया।
विशिष्ट अतिथि प्रो. (डॉ.) अनुप प्रधान ने कहा कि नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों को बहुआयामी अवसर प्रदान कर रही है। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि नवाचार, नेतृत्व और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास करना भी है।
इस अवसर पर डॉ. सुधा सिंह ने विद्यार्थियों को अनुसंधान, रचनात्मकता और सतत अध्ययन की ओर प्रेरित करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही समाज के स्थायी विकास का आधार है।
वहीं डॉ. संदीप शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें भविष्य के नेतृत्व का निर्माण भी करना होता है। उन्होंने विद्यार्थियों को नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. आलोक चतुर्वेदी ने अपने संबोधन में कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के इस दौर में विद्यार्थियों को तकनीकी दक्षता के साथ मानवीय मूल्यों को भी आत्मसात करना होगा। यही उन्हें उत्कृष्ट पेशेवर और जिम्मेदार नागरिक बनाएगा।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) विजेन्द्र कुमार ने अपने दीक्षांत अभिभाषण में कहा कि शिक्षा केवल उपाधि प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति के समग्र विकास की प्रक्रिया है। उन्होंने विद्यार्थियों से ज्ञान, कौशल और नैतिक मूल्यों को जीवन का आधार बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य ऐसे युवाओं का निर्माण करना है जो राष्ट्र निर्माण में प्रभावी भूमिका निभा सकें।
कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. विकास शर्मा ने किया। उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार की ओर से सभी अतिथियों, अभिभावकों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया।
समारोह के अंत में कुलपति प्रो. (डॉ.) विजेन्द्र कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, विश्वविद्यालय प्रशासन, प्राध्यापकों, कर्मचारियों, अभिभावकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का यह प्रथम दीक्षांत समारोह संस्थान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगा।
समारोह में शैक्षणिक परिषद एवं प्रबंध परिषद के सदस्य, विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, अधिकारी, कर्मचारी, अभिभावक तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम में उत्साह, गरिमा और उपलब्धि का विशेष वातावरण देखने को मिला।
