ऋषिकेश

“माँ गंगा की सफाई आज की सबसे बड़ी जरूरत” — डॉ. अनुपम कोठारी

मदर्स डे पर ऋषिकेश में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में गंगा संरक्षण का दिया संदेश

ऋषिकेश। मदर्स डे के अवसर पर द वैदिक शो एवं हिमालयन इको ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में योग नगरी ऋषिकेश में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोटद्वार के योग शिक्षक डॉ. अनुपम कोठारी ने माँ गंगा की स्वच्छता को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि गंगा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन, स्वास्थ्य और आजीविका का आधार है। ऐसे में इसकी स्वच्छता आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुकी है।

डॉ. कोठारी ने अपने संबोधन में वैज्ञानिक तथ्यों और आंकड़ों के माध्यम से गंगा की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ऋषिकेश क्षेत्र में गंगा का Dissolved Oxygen (DO) स्तर लगभग 10 mg/l के आसपास पाया जाता है, जो सामान्य रूप से जलीय जीवन के लिए अनुकूल माना जाता है। हालांकि कई स्थानों पर यह स्तर घटता जा रहा है, जिसका प्रमुख कारण सीवेज और कचरे का नदी में मिलना है।

उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रों में फीकल कोलिफॉर्म बैक्टीरिया की मात्रा सुरक्षित सीमा से अधिक पाई गई है, जिससे गंगा जल पीने और स्नान के लिए भी असुरक्षित हो सकता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि प्रदूषित जल के कारण डायरिया, टाइफाइड जैसी जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।

डॉ. कोठारी ने कहा कि गंगा में रहने वाले जलीय जीवों का जीवन भी जल की गुणवत्ता पर निर्भर करता है और बढ़ता प्रदूषण उनके अस्तित्व के लिए खतरा बनता जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ऋषिकेश जैसे पर्यटन स्थलों की अर्थव्यवस्था गंगा पर आधारित है और यदि नदी प्रदूषित होती है तो इसका सीधा असर पर्यटन व्यवसाय और स्थानीय रोजगार पर पड़ेगा।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने गंगा प्रदूषण के प्रमुख कारणों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि बिना ट्रीटमेंट का सीवेज, प्लास्टिक कचरा, धार्मिक अवशेषों का प्रवाह और बढ़ता पर्यटन दबाव नदी को लगातार प्रदूषित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इन समस्याओं पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

उन्होंने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि गंगा की स्वच्छता केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक दायित्व है। उन्होंने सुझाव दिया कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जाए, प्लास्टिक के उपयोग पर सख्ती से रोक लगे तथा जन-जागरूकता के माध्यम से लोगों को स्वच्छता के प्रति प्रेरित किया जाए।

अपने संदेश में डॉ. कोठारी ने कहा, “माँ गंगा हमारी पहचान है और इसकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। यदि हम आज नहीं जागे तो भविष्य हमें कभी माफ नहीं करेगा।”

इस अवसर पर द वैदिक शो की संस्थापक डॉ. अपर्णा शर्मा, निदेशक शशांक जखमोला, हिमालयन ईको ट्रस्ट के अध्यक्ष वेदांश पाण्डेय, समाजसेवी अरुण कुमार जुगराण, देवेश शर्मा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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