परमार्थ निकेतन में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य शुभारम्भ, संतों के सान्निध्य में उमड़ा श्रद्धा का सागर
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के दिव्य एवं आध्यात्मिक वातावरण में श्रीमद् भागवत कथा का शुभारम्भ अत्यंत भव्य और श्रद्धामयी माहौल में हुआ। स्वामी चिदानन्द सरस्वती के पावन सान्निध्य में प्रसिद्ध कथावाचक रमेशभाई ओझा (भाईश्री) के श्रीमुख से ज्ञान गंगा स्वरूप कथा का प्रवाह आरम्भ हुआ।
कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसमें ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, डॉ. मनोहर भास्कर राव सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों ने सहभागिता की।

माँ गंगा के पावन तट पर आयोजित इस आध्यात्मिक महोत्सव में भारत ही नहीं बल्कि विश्व के विभिन्न देशों से आए श्रद्धालु और साधक बड़ी संख्या में भाग ले रहे हैं। यह आयोजन भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और जीवन मूल्यों से जुड़ने का एक अनमोल अवसर बनकर उभर रहा है।
कथावाचक भाईश्री, जिनकी आयु 68 वर्ष है, पिछले 55 वर्षों से निरंतर श्रीमद् भागवत कथा का वाचन कर रहे हैं और अपने अमृतमय प्रवचनों से भक्ति, ज्ञान और संस्कारों का संदेश दे रहे हैं।
इस अवसर पर नदेंदला भास्कर राव एवं यजमान परिवार के पूर्वजों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि भाईश्री भारतीय संस्कृति के जीवंत स्वरूप हैं, जो सनातन मूल्यों को विश्वभर में प्रसारित कर मानवता को जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान बाहरी दूरियों को कम करता है, जबकि श्रीमद् भागवत कथा और संस्कृति आंतरिक दूरी को समाप्त करती है।
वहीं ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी जी ने कहा कि वर्ष 1984 से वे, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और भाईश्री साथ मिलकर सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि गंगा तट पर कथा श्रवण का अवसर दुर्लभ होता है और यह केवल सौभाग्य से ही प्राप्त होता है।
कार्यक्रम में गंगा संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक जागरूकता के संदेश भी दिए गए। परमार्थ निकेतन की गंगा आरती का दृश्य श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा, जहां आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
इस अवसर पर यजमान परिवार के श्री नरेश अग्रवाल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे और सप्तदिवसीय कथा का श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त कर रहे हैं।
