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हरिद्वार में नई समय सारणी का विरोध, प्राथमिक शिक्षक संघ ने पुनर्विचार की उठाई मांग

हरिद्वार/रुड़की। हरिद्वार जनपद में लागू की गई नई विद्यालय समय सारणी को लेकर विरोध के स्वर उठने लगे हैं। उत्तरांचल स्टेट प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन, हरिद्वार इकाई ने प्रांतीय तदर्थ समिति को पत्र भेजकर पूर्ववत अथवा संशोधित समय सारणी लागू करने की मांग की है।

संघ के जिलाध्यक्ष अश्वनी चौहान, जिला मंत्री हेमेन्द्र चौहान एवं कोषाध्यक्ष अरविंद कुमार शर्मा ने संयुक्त रूप से इस संबंध में आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि सचिव, विद्यालयी शिक्षा, उत्तराखंड द्वारा 6 अप्रैल 2026 को जारी आदेश के तहत प्रदेशभर में नई समय सारणी लागू की गई है।

 

संघ पदाधिकारियों का कहना है कि हरिद्वार जैसे मैदानी क्षेत्रों में ग्रीष्मकाल के दौरान अत्यधिक गर्मी, आर्द्रता एवं लू की स्थिति छोटे बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है। जिलाध्यक्ष अश्वनी चौहान ने कहा कि 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चे शारीरिक एवं मानसिक रूप से संवेदनशील होते हैं, ऐसे में दिन के अधिक गर्म समय तक विद्यालय में रुकना उनके लिए हानिकारक हो सकता है। इससे लू लगना, निर्जलीकरण और थकान जैसी समस्याएं बढ़ेंगी, जो उनकी उपस्थिति और सीखने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं।

जिला मंत्री हेमेन्द्र चौहान ने कहा कि सभी आयु वर्गों के लिए एक समान समय सारणी लागू करना व्यावहारिक नहीं है। बाल मनोविज्ञान के अनुसार बच्चों की एकाग्रता अनुकूल वातावरण और समय निर्धारण पर निर्भर करती है, इसलिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप लचीली व्यवस्था जरूरी है।

कोषाध्यक्ष अरविंद कुमार शर्मा ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21, 21ए एवं 39(1) बच्चों के सुरक्षित एवं स्वस्थ जीवन की गारंटी देते हैं। वहीं शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तथा एनसीएफ-एफएस 2022 भी बाल-केंद्रित एवं स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था पर बल देते हैं। ऐसे में वर्तमान समय सारणी इन प्रावधानों के विपरीत प्रतीत होती है।

संघ पदाधिकारियों ने प्रांतीय तदर्थ समिति से मांग की है कि हरिद्वार की जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पूर्ववत समय सारणी को पुनः लागू कराने हेतु शासन स्तर पर प्रभावी पहल की जाए। उन्होंने विश्वास जताया कि समिति छात्र हित को सर्वोपरि रखते हुए शीघ्र आवश्यक कार्यवाही करेगी।

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