संगम तट पर दिव्यता का महाउत्सव: भगवान श्री जगन्नाथ जी की प्राणप्रतिष्ठा सम्पन्न
प्रयागराज। परमार्थ त्रिवेणी पुष्प, संगम तट पर भगवान श्री जगन्नाथ जी की प्राणप्रतिष्ठा का भव्य, अलौकिक एवं वैदिक अनुष्ठान अत्यंत श्रद्धा और शास्त्रीय विधि-विधान के साथ सम्पन्न हुआ। वेदमंत्रों के पवित्र उच्चारण, शंखध्वनि, घंटानाद और हवन की सुगंध से संगम क्षेत्र दिव्यता से आलोकित हो उठा। यह आयोजन सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और राष्ट्रीय एकात्मता का विराट उत्सव बन गया।
प्रातःकाल सूर्य पूजन के साथ भगवान श्री जगन्नाथ जी की प्रतिमा में प्राणों का आवाहन होते ही वातावरण “जय जगन्नाथ” के उद्घोष से गुंजायमान हो गया। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम पर आचार्यों, पुरोहितों एवं वेदपाठी बटुकों द्वारा सम्पन्न प्रत्येक विधि अत्यंत सूक्ष्म, शुद्ध और शास्त्रसम्मत रही।

इस पावन अवसर पर जगन्नाथ पुरी से पधारे महाराजों द्वारा महाप्रसाद एवं महाभोग का निर्माण किया गया। आयोजन के उपरांत विशाल महाभंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं, संतों, आचार्यों, पुरोहितों और बटुकों ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया।
यह आयोजन सनातन दर्शन की उस अखंड परंपरा का स्मरण कराता है, जिसे ऋषि-मुनियों ने युगों से पोषित किया है। आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार धामों की आध्यात्मिक एकता की भावना को वर्तमान युग में पुनर्जीवित करते हुए पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के मार्गदर्शन में संगम की इस पावन भूमि पर चारों धामों की चेतना का संगम साकार हुआ। यह केंद्र “राष्ट्र प्रथम” और “संगच्छध्वं संवदध्वं” के संदेश के साथ राष्ट्रीय एकता का संवाहक बनेगा।
परमार्थ त्रिवेणी पुष्प में निर्मित यह आध्यात्मिक केंद्र केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि समग्र भारत की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक है। यहां श्रद्धालुओं को चारों धामों तथा उत्तराखंड के पावन धामों के दर्शन और अनुभव एक ही स्थल पर प्राप्त होंगे, जिससे संगम भूमि पर ही संपूर्ण धामों का पुण्य लाभ सुलभ होगा।
संगम की पावन रेत पर सम्पन्न यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। यह संदेश देता है कि जब आस्था और संगठन साथ आते हैं, तब संस्कृति पुनर्जागृत होती है, राष्ट्र सशक्त होता है और मानवता आलोकित होती है। भगवान श्री जगन्नाथ जी की यह प्राणप्रतिष्ठा सनातन चेतना के नवजागरण का शंखनाद है, जो “वसुधैव कुटुम्बकम्” का संदेश समस्त विश्व तक प्रसारित करता है।
यह दिव्य आयोजन श्री विनोद बागरोडिया जी, श्री रजत बागरोडिया जी, श्रीमती उपासना बागरोडिया जी, सम्पूर्ण बागरोडिया परिवार एवं आभा बागरोडिया चैरिटेबल ट्रस्ट के सौजन्य से सम्पन्न हुआ।
