गृहॆ गृहॆ संस्कृतम् योजना का ऑनलाइन समापन समारोह सम्पन्न
देहरादून। भाषा विभाग उत्तरप्रदेश शासन के अधीन उत्तरप्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ द्वारा “गृहॆ गृहॆ संस्कृतम्” योजना के अन्तर्गत आयोजित अगस्त मासीय सरल संस्कृत भाषा शिक्षण कक्षाओं का सामूहिक समापन समारोह आज ऑनलाइन गूगल-मीट माध्यम से सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. रामभूषण विजल्वाण, प्राचार्य, श्रीलक्ष्मण संस्कृत महाविद्यालय, देहरादून रहे। उन्होंने कहा कि “गृहॆ गृहॆ संस्कृतम्” नाम से ही योजना का उद्देश्य स्पष्ट होता है। परिवार में जब सदस्य संस्कृत में संवाद करते हैं, तो यह केवल भाषा न रहकर जीवनशैली बन जाती है। संस्कृत अभ्यास बचपन से ही सहज संवाद के रूप में होना चाहिए।
विशिष्ट अतिथि आचार्य विजेंद्र प्रसाद ममगाईं, निवर्तमान अध्यक्ष, उत्तराखण्ड विद्वत्सभा, ने संस्थान के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सरल संस्कृत शिक्षण कक्षाएँ, प्रतियोगिताएँ और कार्यशालाएँ संस्कृत प्रचार-प्रसार में मील का पत्थर साबित हो रही हैं।
संस्थान के निदेशक विनय श्रीवास्तव ने कहा कि संस्कृत का अध्ययन केवल शास्त्रों तक सीमित न होकर व्यवहार भाषा के रूप में समाज के प्रत्येक क्षेत्र तक पहुँचना चाहिए। उन्होंने बताया कि संस्थान की ऑनलाइन योजनाएँ अत्यन्त सफल रही हैं और आमजन इससे लाभान्वित हुए हैं।
समारोह में संस्कृत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए युवाओं से इसे अपनाने का आह्वान किया गया। यह भी उल्लेख किया गया कि जर्मनी, अमेरिका, जापान और रूस जैसे देशों में संस्कृत शोध और अध्यापन का विषय है, ऐसे में भारतवासियों का दायित्व है कि वे अपनी भाषा और संस्कृति पर गर्व करें।
कार्यक्रम संचालन नीलाक्षी श्रीवास्तव ने किया। सरस्वती वन्दना नीलम श्रीवास्तव तथा संस्थान गीतिका रहमती ने प्रस्तुत की। वाचिक स्वागत दिव्य रंजन, स्वागत गीत गंगोत्री शुक्ला, प्रस्ताविक भाषण धीरज मैठाणी, अनुभव कथन मञ्जुलता चौहान, धन्यवाद ज्ञापन अनिल गौतम एवं शान्ति मन्त्र प्राञ्जल गुप्ता द्वारा प्रस्तुत किया गया।
इस अवसर पर डॉ. नवीन जोशी सहित अनेक विद्वज्जन, शिक्षक, शिक्षार्थी, अभिभावक एवं सामाजिक संस्कृतानुरागी उपस्थित रहे।
समारोह में योजना प्रभारी भगवान सिंह चौहान, परिकल्पक दिव्य रंजन व राधा शर्मा तथा तकनीकी सहयोगी महेंद्र मिश्र विशेष रूप से उल्लेखनीय रहे।
