राधा रानी प्राकट्य दिवस पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती का संदेश
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को श्रद्धांजलि
ऋषिकेश। सनातन संस्कृति के दिव्य मूल्यों, भक्ति, करुणा और समर्पण के जीवंत स्मरण दिवस श्री राधा रानी जी प्राकट्य दिवस पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने देशवासियों को शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।

स्वामी जी ने कहा कि अगाध प्रेम और अकाट्य समर्पण की सलिल सरिता श्री राधा रानी प्रेम की वह अनंत धारा हैं, जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ती है। उनका जीवन संदेश देता है कि प्रेम कोई लेन-देन नहीं है, बल्कि निःस्वार्थ भाव, करुणा और माधुर्य का संगम है।
उन्होंने कहा कि श्री राधा जी के बिना श्रीकृष्ण अधूरे हैं और श्रीकृष्ण बिना राधा जी। यही भाव भक्ति की गहराई और आत्मसमर्पण का आदर्श प्रस्तुत करता है। संत सूरदास, मीराबाई और रसखान जैसे कवियों ने राधा-कृष्ण की लीला को मानव जीवन की आध्यात्मिक यात्रा का प्रतीक बताया है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने आगे कहा कि जब तक हृदय में अहंकार है, तब तक वास्तविक प्रेम संभव नहीं। राधा जी ने अपने अस्तित्व को श्रीकृष्ण में विलीन कर दिया, यही आत्मसमर्पण आज के युग के लिए भी मार्गदर्शन है। वर्तमान समय में प्रतिस्पर्धा, अहंकार और स्वार्थ के कारण समाज बिखर रहा है, ऐसे में राधा जी का निःस्वार्थ प्रेम और करुणा हमें एकजुट करने की शक्ति रखते हैं।
स्वामी जी ने कहा कि श्री राधा रानी का प्राकट्य दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को जीवन में धारण करने का संकल्प भी है।
इस अवसर पर उन्होंने भारत के 13वें राष्ट्रपति एवं भारत रत्न स्वर्गीय प्रणब मुखर्जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण और भारत की लोकतांत्रिक परंपरा में उनका योगदान सदैव स्मरणीय और प्रेरणादायी रहेगा।
