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“सौ सुनार की एक लोहार की” चांदपुर में सैनू भाई ने हिला दी सियासत की जमीन

चांदपुर जिला पंचायत चुनाव में सैनू भाई ने रचा संघर्ष की मिसाल, हार कर भी जीत लिया दिल

द्वारीखाल। चुनाव में बड़े-बड़े दिग्गजों के पसीने छुड़ा देने वाले निर्दलीय प्रत्याशी सैन सिंह उर्फ सैनू भाई ने इस कहावत को चांदपुर की राजनीति में साकार कर दिखाया — “सौ सुनार की, एक लोहार की”।

चांदपुर सामान्य सीट से जिला पंचायत चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी सैन सिंह उर्फ सैनू भाई ने अपने संघर्ष, सादगी और जनसंपर्क से क्षेत्र की राजनीति में एक नई लहर पैदा की है। लोहार परिवार से ताल्लुक रखने वाले सैन सिंह का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। परंपरागत लोहार का काम अब पलायन और खेती की बेरुखी के चलते ठप हो चला है, ऐसे में उन्होंने कबाड़ बीनने और मजदूरी से परिवार का पेट पाला। उनकी पत्नी भी कंधे से कंधा मिलाकर साथ दे रही हैं।

 

पैदल चले दर्जनों गांव, दिलों में बनाई जगह

बगैर किसी भारीभरकम तामझाम के, सैन सिंह ने पैदल चलकर दर्जनों गांवों का दौरा किया। हर दरवाज़े पर दस्तक दी, हर दिल से जुड़ाव बनाया। उनके सरल व्यवहार और ईमानदारी ने लोगों को इस कदर प्रभावित किया कि कई मतदाताओं ने न सिर्फ वोट दिया, बल्कि आर्थिक सहयोग भी किया।

हार के बाद भी फूल-मालाओं से स्वागत, बढ़ रही लोकप्रियता

हालांकि चुनाव में उन्हें दूसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा और भाजपा समर्थित विक्रम सिंह बिष्ट ने जीत दर्ज की, पर हार के बाद भी सैन सिंह को जनता ने सिर आंखों पर बैठाया। जगह-जगह फूल मालाएं पहनाकर स्वागत किया जा रहा है, आर्थिक रूप से सहयोग भी मिल रहा है।

“मैं चुनाव हारा हूं, पर जनता का विश्वास नहीं”

सैन सिंह का कहना है, “चुनाव हारना कोई हार नहीं, ये जनता का प्रेम और भरोसा ही मेरी असली जीत है। शब्द कम पड़ जाते हैं, गूंगे ने गुड़ खाया – वो मिठास मैं कैसे बयान करूं।”

जमीनी हकीकत से वाकिफ, भविष्य की राजनीति के मजबूत चेहरे

सैन सिंह रोज़ उकाल-उन्दार की विषम परिस्थितियों में काम करने वाले आम आदमी हैं। वे क्षेत्र की समस्याओं को बारीकी से जानते हैं और उसका हल भी खोजते हैं। यही वजह है कि आज भी इलाके में सिर्फ एक नाम गूंज रहा है – “सैनू भाई”।

 

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