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परमार्थ निकेतन में अमर शहीद श्रीदेव सुमन को श्रद्धांजलि

*आयुष सचिव दीपेंद्र चौधरी पहुंचे ऋषिकेश*

ऋषिकेश। अमर शहीद श्रीदेव सुमन जी की पुण्यतिथि पर श्रद्धा और प्रेरणा से भरा विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर उत्तराखंड के आयुष एवं आयुष शिक्षा सचिव श्री दीपेंद्र चौधरी (आईएएस) परमार्थ निकेतन पहुँचे और स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी से भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी एवं परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमारों ने श्रीदेव सुमन जी को समर्पित विशेष यज्ञ किया और गंगा आरती में श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें कृतज्ञता सहित स्मरण किया।

इस अवसर पर उत्तराखंड को ‘हेल्थ एवं वेलनेस स्टेट’ के रूप में विकसित करने को लेकर गहन चर्चा भी हुई। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि “हमें उत्तराखंड को वैश्विक हेल्थ व वेलनेस मैप पर प्रमुख स्थान दिलाना होगा। आयुर्वेद और योग की समृद्ध परंपरा को संरक्षित कर स्वरोजगार व पर्यटन दोनों को बढ़ावा दिया जा सकता है।”

उन्होंने कहा कि गढ़वाल व कुमाऊं में वेलनेस सेंटर्स की स्थापना से जहां प्रदेश की महिलाओं व युवाओं को रोजगार मिलेगा, वहीं देश-विदेश से आने वाले योग साधकों को प्रशिक्षण व चिकित्सा का लाभ भी मिलेगा।

शहीद श्रीदेव सुमन जी को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि “श्रीदेव सुमन केवल एक क्रांतिकारी नहीं, बल्कि चेतना का स्थायी स्रोत हैं।” उन्होंने कहा कि उनका जीवन त्याग, तपस्या, सत्य और राष्ट्र समर्पण की अनुपम मिसाल है।

उन्होंने याद दिलाया कि 1944 में टिहरी रियासत के अत्याचार के विरुद्ध आवाज़ उठाने पर सुमन जी को 84 दिनों का आमरण अनशन करना पड़ा, जिसके चलते 25 जुलाई 1944 को उन्होंने प्राण त्याग दिए। लेकिन वो विचार, वो चेतना आज भी जीवित है और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

स्वामी जी ने कहा कि, “आज की पीढ़ी को सुमन जी जैसे बलिदानियों से प्रेरणा लेनी चाहिए। वे दिखाते हैं कि एक अकेला व्यक्ति भी अन्याय के विरुद्ध क्रांति खड़ी कर सकता है।” उन्होंने कहा कि श्रीदेव सुमन जी का नाम इतिहास की पुस्तकों से आगे बढ़कर जनचेतना व संस्कृति में रच-बस गया है।

अंत में स्वामी जी ने संदेश दिया कि –”राष्ट्र से बड़ा कोई धर्म

नहीं और सेवा से बड़ी कोई साधना नहीं। श्रीदेव सुमन जी का बलिदान हमें एक सशक्त, संवेदनशील व जागरूक समाज की दिशा में प्रेरित करता है। यही उनकी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”

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