उत्तराखंडऋषिकेश

परमार्थ निकेतन से अमर क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि, महाशिवरात्रि पर विश्व को शुभकामनाएं

ऋषिकेश। स्वामी चिदानन्द सरस्वती  महाराज ने अमर क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आजाद की जयंती पर मां गंगा के पावन तट से विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर समस्त देशवासियों और विश्व परिवार को शुभकामनाएं दीं।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा,

“23 जुलाई भारतीय इतिहास का वह स्वर्णिम दिन है, जब एक ऐसी ज्वाला जन्मी जिसने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी – वह ज्वाला थे चन्द्रशेखर आजाद।”

उन्होंने कहा कि आजाद केवल एक स्वतंत्रता सेनानी नहीं, बल्कि भारतीय आत्मा के स्वाभिमान और संघर्ष के प्रतीक थे। मात्र 24 वर्ष की आयु में देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले आजाद का जीवन आज भी देश के युवाओं के लिए प्रेरणा है।

“आज का दिन केवल स्मरण नहीं, बल्कि आह्वान है – क्या हम आजाद के सपनों का भारत बना सके हैं? क्या आज के युवा उतने ही समर्पित, साहसी और राष्ट्रनिष्ठ हैं?”

स्वामी जी ने आज की युवा पीढ़ी को आत्ममंथन का संदेश देते हुए कहा कि आज जब समाज पश्चिमी प्रभाव, नशे और आत्मकेन्द्रिकता की ओर बढ़ रहा है, ऐसे समय में चन्द्रशेखर आजाद की जयंती जागृति का बिगुल है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि स्वतंत्रता केवल राजनीतिक नहीं होती, वह मानसिक, सांस्कृतिक और आत्मिक चेतना का विषय भी है।

महाशिवरात्रि पर शिवत्व और संतुलन का संदेश

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि महाशिवरात्रि आत्मचेतना और ब्रह्मांडीय संतुलन से जुड़ने की रात्रि है। भगवान शिव केवल संहारक नहीं, बल्कि संतुलन, करुणा और नवसृजन के प्रतीक हैं।

“जब हम शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं, यह केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि हमारे भीतर के अहंकार और नकारात्मकता को शुद्ध करने की साधना होती है।”

उन्होंने कहा कि आज जब पृथ्वी जलवायु संकट और पर्यावरण असंतुलन से जूझ रही है, तब हमें शिव से प्रेरणा लेकर ‘नीलकंठ’ बनना होगा – अपने स्वार्थों के विष को पीकर समाज और प्रकृति की रक्षा के लिए आगे आना होगा।

इस अवसर पर स्वामी जी ने संकल्प दिलाया:

हर जीवन साधना बने

हर कर्म सेवा बने

प्रकृति की रक्षा हमारा धर्म बने

और हमारा जीवन शिवमय बने

परमार्थ निकेतन परिवार की ओर से महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं एवं चन्द्रशेखर आजाद को कोटि-कोटि नमन।

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