“अगर आप भारत के प्रधानमंत्री हैं, तो पुतिन को फोन करें” — NATO प्रमुख की सख्त चेतावनी, भारत ने दिया करारा जवाब
नई दिल्ली/ब्रसेल्स, 17 जुलाई 2025: NATO के महासचिव मार्क रुटे ने रूस के साथ व्यापार जारी रखने को लेकर भारत, चीन और ब्राज़ील को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि इन देशों ने रूस के साथ ऊर्जा और अन्य व्यापारिक संबंध बनाए रखे, तो उन्हें “पूर्ण सेकेंडरी प्रतिबंधों” (100% Secondary Sanctions) का सामना करना पड़ सकता है।

रुटे ने अपने बयान में नेताओं को प्रत्यक्ष रूप से संबोधित करते हुए कहा:
> “अगर आप भारत के प्रधानमंत्री हैं, तो पुतिन को कॉल करें और कहें कि वो शांति प्रक्रिया को गंभीरता से लें। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो हम कठोर प्रतिबंध लगाएंगे।”
भारत ने किया पलटवार: “डबल स्टैंडर्ड स्वीकार नहीं“
भारत ने NATO प्रमुख की इस टिप्पणी को तीव्रता से खारिज करते हुए इसे दोहरे मापदंड (Double Standards) करार दिया। विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रंधीर जैसवाल ने कहा:
> “भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं और राष्ट्रीय हितों के अनुसार स्वतंत्र नीति अपनाता है। हम किसी भी प्रकार के बाहरी दबाव या पक्षपातपूर्ण चेतावनियों को स्वीकार नहीं करेंगे।
तेल एवं गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी स्पष्ट किया कि भारत के पास रूस के अलावा वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं जैसे गयाना, कनाडा और ब्राज़ील की संभावनाएं मौजूद हैं, और देश को किसी एक स्रोत पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
रूस से व्यापार की भारत की स्थिति
रूस अब भारत का प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता बन चुका है, जिससे भारत को वैश्विक बाजार मूल्य से कम दरों पर कच्चा तेल मिल रहा है।
भारत अपनी कुल तेल ज़रूरत का लगभग 88% आयात करता है, और रूस इसका लगभग 40% हिस्सा आपूर्ति करता है।
भारत ने बार-बार दोहराया है कि वह रणनीतिक स्वायत्तता और गैर-गठबंधन नीति के सिद्धांतों पर कायम है।
क्या हैं सेकेंडरी सैन्क्शन्स?
सेकेंडरी सैन्क्शन्स वे प्रतिबंध हैं जो उन तीसरे देशों पर लगाए जाते हैं जो रूस जैसे प्रतिबंधित देशों से व्यापार करते हैं। ये प्रतिबंध विशेष रूप से अमेरिका और उसके सहयोगियों की ओर से लगाए जाते हैं और व्यापार, बैंकिंग, और निवेश को प्रभावित कर सकते हैं।
🌍 वैश्विक रणनीति बनाम संप्रभुता
पक्ष दृष्टिकोण
NATO (मार्क रुटे) रूस से व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध की चेतावनी
भारत (MEA) स्वतंत्र नीति की पुष्टि, डबल स्टैंडर्ड पर आपत्ति
हरदीप पुरी वैकल्पिक स्रोतों पर भरोसा, आत्मनिर्भरता
वैश्विक विश्लेषण रणनीतिक दबाव बनाम ऊर्जा सुरक्षा की चुनौती
निष्कर्ष:
NATO की ओर से रूस के खिलाफ गठबंधन को मजबूत करने का प्रयास अब भारत जैसे स्वतंत्र नीति अपनाने वाले देशों पर दबाव डालने की कोशिश में बदलता दिख रहा है। लेकिन भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि उसकी प्राथमिकता राष्ट्रीय हित, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक संतुलन है — न कि किसी एक गुट के साथ अंध समर्थन।
यह टकराव आने वाले दिनों में भूराजनीतिक और आर्थिक समीकरणों को और अधिक गहरा कर सकता है।
