उत्तराखंडऋषिकेश

गुरूपूर्णिमा के पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन में पूज्य गुरूओं का पूजन कर लिया आशीर्वाद

*पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी एक ऐसे गुरू जिन्होंने सनातन संस्कृति के साथ सम्पूर्ण मानवता की सेवा के लिये अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया, उनकी दिव्य साधना एवं सेवा को नमन। उनके आदर्श हम सभी के जीवन का पाथेय बने*-:  रेखा मशरूवाला, अमेरिका*

ऋषिकेश। गुरुपूर्णिमा के पावन अवसर पर वैश्विक परमार्थ परिवार ने पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी असंगानन्द सरस्वती जी महाराज और पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज का पूजन-अर्चन कर सम्पूर्ण गुरू परम्परा को नमन किया।

गुरूपूर्णिमा का पावन पर्व जीवन को आलोकित करने वाली उस दिव्य परंपरा का उत्सव है जो गुरु-शिष्य संबंध की पवित्रता, सेवा, श्रद्धा और सत्य के मूल्यों को आत्मसात करने का पर्व है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि वर्ष भर में बारह पूर्णिमाएँ आती हैं, परंतु गुरूपूर्णिमा का विशेष स्थान प्राप्त है। यह चंद्रमा की पूर्णता और मानव चेतना की पूर्णता का पर्व है। यह पूर्णिमा केवल खगोलीय घटना नहीं, बल्कि आत्मिक जागरण और गुरु-शक्ति के सम्मान का पर्व है।

गुरूपूर्णिमा अर्थात् आध्यात्मिक ज्ञान, गुरु-शिष्य परंपरा और आत्मोन्नति का पर्व। आज के ही दिन भगवान शिव ने सप्तर्षियों को योग का पहला ज्ञान दिया था इसलिए यह गुरु-तत्व के जागरण का दिन भी है। इस गुरुपूर्णिमा पर उन सभी को प्रणाम, जिन्होंने किसी रूप में हमें कुछ न कुछ सिखाया, चाहे वह माता-पिता हों, शिक्षक हों, हमारे अनुभव हो या फिर हमारे संघर्ष हों, हर सीख और हर गलती गुरु ही तो है।

अमेरिका से आयी रेखा मशरूवाल ने कहा कि परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, एक युगपुरुष हैं जिन्होंने न केवल सनातन संस्कृति की दिव्यता को जन-जन तक पहुँचाया, अपितु सम्पूर्ण मानवता के कल्याण हेतु अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया और उसी का दिव्य प्रमाण है अमेरिका का हिन्दू जैन टेम्पल, जो भारतीय संस्कारों को विदेश की धरती पर आलोकित कर रहा है।

साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि पूज्य स्वामी जी का जीवन “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने धर्म, संस्कृति, सेवा और पर्यावरण को एक सूत्र में पिरोते हुए अध्यात्म और सामाजिक उत्तरदायित्व का ऐसा संगम किया ाजो आज पूरे विश्व के लिये प्रेरणास्रोत है। आज के समय में जब भौतिकता और आत्मकेन्द्रितता ने समाज को बांध रखा है, ऐसे समय में पूज्य स्वामी जी का जीवन एक खुला ग्रंथ है, जिसमें सेवा, साधना, संयम और संस्कार के पृष्ठ हैं।

आज पूरे विश्व से श्रद्धालुओं ने आनलाइन प्लेटफार्म से जुड़कर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का आशीर्वाद लिया।

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