चैलूसैंण के नजदीक लगातार धधक रहे जंगल
द्वारीखाल। कई दशकों से हम यह देखते हुए आ रहे हैं कि गर्मी के मौसम में पहाड़ों में जंगल धधकने लगते हैं। हर साल अमूल्य वन सम्पदा खाक हो जाती है।
दशमेरी के जंगल में 15 मई से लगी आग आज दोपहर तक चैलूसैण देवीखेत मोटरमार्ग तक पहुंच गई। लेकिन वन विभाग को इस बात की कोई भनक नहीं लगी। इसके अलावा कण्डाखणीखाल के नजदीक जंगलों से धुआं दूर दूर तक फैल रहा था। जिससे यह प्रबल संभावना है कि वहां भी जंगल जल रहे हैं।

हर साल बरसात में जंगलों में पेड़ पौधे लगाए जाते हैं लेकिन यह आकलन नहीं होता है कि उनमें से कितने पेड़ पौधे जीवित हैं। आखिर कब तक जंगल जलते रहेंगे, इस बात का किसी के पास कोई ठोस जवाब नहीं है। जंगलों को बचाने के लिए अभी तक हम हर मोर्चे पर विफल रहे हैं।

जंगलों में आग लगना एक सामान्य बात हो गई है, आग लगने का कारण एवं रोकथाम के ठोस उपाय न होने के कारण अनेक जंगली जानवर एवं कीट पतंगे अपना जीवन खो देते हैं। अनेक वनस्पतियां एवं जीव जंतु हर साल अपना अस्तित्व खो रहे हैं।
