परमार्थ निकेतन में श्रद्धा, साधना और सेवा के साथ मनाई जा रही दीपावली
स्वामी चिदानन्द सरस्वती बोले- पर्व हमारे विचारों को बदलते हैं, विचार व्यवहार और व्यवहार जीवन को बदलता है
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में दीपावली का पावन पर्व श्रद्धा, भक्ति, साधना, सेवा और संस्कारों के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर परमार्थ पीठाधीश्वर स्वामी चिदानन्द सरस्वती एवं साध्वी भगवती सरस्वती के पावन सान्निध्य में आध्यात्मिक साधना, सत्संग, योग, ध्यान और सेवा से जुड़े विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

दीपावली के अवसर पर परमार्थ निकेतन में तीन दिवसीय ‘डिस्कवरिंग द लाइट विदिन’ आध्यात्मिक शिविर का आयोजन किया गया है। इसमें भारत सहित विभिन्न देशों के प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। शिविर के दौरान योग, ध्यान, आयुर्वेद, नाद योग, आध्यात्मिक चिंतन और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को आंतरिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव कराया जा रहा है।
प्रातःकाल स्वामी चिदानन्द सरस्वती के सान्निध्य में यज्ञ, मंत्रोच्चार और आध्यात्मिक साधनाओं के माध्यम से विश्व शांति, पर्यावरण संरक्षण और सर्वकल्याण की कामना की गई। वहीं साध्वी भगवती सरस्वती के मार्गदर्शन में आयोजित सत्संग में आत्मबोध, भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों का संदेश दिया गया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि भारतीय संस्कृति में पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि जीवन को संस्कारित करने की सुंदर व्यवस्था हैं। धनतेरस स्वास्थ्य और आरोग्य, नरक चतुर्दशी बाहरी एवं आंतरिक स्वच्छता, दीपावली ज्ञान और सद्बुद्धि, गोवर्धन पूजा प्रकृति संरक्षण तथा भाई दूज पारिवारिक प्रेम और आत्मीयता का संदेश देती है।
उन्होंने कहा कि पर्व हमें संस्कारों से जोड़ते हैं और संस्कार हमें अपने मूल से जोड़ते हैं। पर्व हमारे विचारों को बदलते हैं, विचार हमारे व्यवहार को बदलते हैं और व्यवहार हमारे जीवन को बदलता है। पर्वों की सार्थकता तभी है, जब उनके संदेश हमारे दैनिक जीवन और व्यवहार में दिखाई दें।
स्वामी जी ने कहा कि नई पीढ़ी को पर्वों का महत्व केवल नए कपड़ों, मिठाइयों, आतिशबाजी और उपहारों तक सीमित रखकर नहीं समझाना चाहिए, बल्कि उन्हें इनसे जुड़े संस्कारों और जीवन मूल्यों से भी परिचित कराना आवश्यक है। जरूरतमंदों के साथ खुशियां बांटना, बड़ों का सम्मान करना, छोटों को स्नेह देना और प्रकृति का संरक्षण करना ही पर्वों की वास्तविक सार्थकता है।
साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि दीपावली का संदेश है कि प्रकाश बांटने से कभी कम नहीं होता। पर्वों का वास्तविक आनंद तभी है, जब हमारी खुशियों में दूसरों की मुस्कान भी शामिल हो। उन्होंने आह्वान किया कि इस दीपावली अपने घर के लिए एक दीप जलाने के साथ किसी ऐसे घर के लिए भी दीप जलाएं, जहां अभाव के कारण उत्सव की रोशनी नहीं पहुंच पाती।
दीपावली के अवसर पर परमार्थ निकेतन में श्रीसूक्तम् मंत्रोच्चार, मां लक्ष्मी की आराधना, रंगोली सज्जा, दीप प्रज्ज्वलन, हवन और मां गंगा की दिव्य आरती सहित विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमार भजन, कीर्तन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं का संदेश दे रहे हैं।
परमार्थ निकेतन की ओर से संदेश दिया गया कि इस दीपावली पर घर के साथ अपने हृदय में भी प्रकाश का दीप जलाएं। संस्कार, सेवा, सद्भाव और विश्व कल्याण के संकल्प के साथ पर्व मनाएं।

