छोटी दीपावली पर परमार्थ विद्या मंदिर और गुरुकुल के विद्यार्थियों व शिक्षकों के साथ स्वामी चिदानंद सरस्वती ने बांटी खुशियां
स्नेह और उपहार भेंट कर दिया प्रेम एवं सेवा का संदेश, त्योहारों पर शुद्ध और सुरक्षित मिठाइयां खरीदने की अपील
ऋषिकेश। नरक चतुर्दशी एवं छोटी दीपावली के पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन में खुशियों और स्नेह का माहौल देखने को मिला। परमार्थ पीठाधीश्वर स्वामी चिदानंद सरस्वती ने परमार्थ विद्या मंदिर एवं परमार्थ गुरुकुल के अध्यापकों और अध्यापिकाओं को उपहार भेंट कर दीपावली की खुशियां साझा कीं। इस दौरान उन्होंने प्रेम, सेवा, संस्कार और जरूरतमंदों के जीवन में खुशियों का प्रकाश फैलाने का संदेश दिया।

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि दीपावली केवल दीप जलाने और घर सजाने का पर्व नहीं है, बल्कि दूसरों के जीवन में मुस्कान लाने और प्रेम बांटने का अवसर है। एक छोटी-सी मुस्कान किसी के जीवन में बड़ी खुशी बन सकती है। दीपावली का वास्तविक प्रकाश हमारे विचारों, व्यवहार और संस्कारों में दिखाई देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नरक चतुर्दशी हमें अपने भीतर की नकारात्मकता, अहंकार, ईर्ष्या और अज्ञान के अंधकार को समाप्त करने की प्रेरणा देती है। वहीं रूप चतुर्दशी का संदेश बाहरी सुंदरता के साथ-साथ अंतर्मन को पवित्रता, करुणा और सकारात्मक विचारों से सजाने का भी है। भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का अंत कर अन्याय और अत्याचार से मुक्ति का संदेश दिया था।
इस अवसर पर स्वामी चिदानंद सरस्वती ने त्योहारों के दौरान शुद्ध एवं सुरक्षित खाद्य पदार्थों के सेवन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि दीपावली के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में उपभोक्ताओं को मिठाइयों की गुणवत्ता, स्वच्छता और शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। मिलावट और अस्वच्छ खाद्य पदार्थ जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।
उन्होंने खाद्य कारोबारियों से निर्धारित मानकों का पालन करने, नियामक संस्थाओं से नियमों का निष्पक्षता और सख्ती से पालन कराने तथा नागरिकों से जागरूक उपभोक्ता बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि त्योहारों की मिठास मिलावट से नहीं, बल्कि प्रेम और विश्वास से बढ़नी चाहिए।
स्वामी जी ने कहा कि दीपावली तभी वास्तव में मंगलमय होगी, जब हर घर में खुशियों के साथ स्वास्थ्य, सुरक्षा और संस्कारों का प्रकाश भी पहुंचे। परमार्थ विद्या मंदिर एवं परमार्थ गुरुकुल के शिक्षकों के साथ मनाया गया यह स्नेहपूर्ण उत्सव प्रेम, सेवा और सामाजिक संवेदनशीलता का संदेश दे गया।

