वाराणसी में ‘हमारे मनु’ समारोह में पद्मश्री मनु शर्मा की साहित्यिक विरासत का भव्य उत्सव
स्वामी चिदानन्द सरस्वती के सान्निध्य में तीन पुस्तकों का लोकार्पण, हरिवंश और ब्रजेश पाठक सहित कई विशिष्ट हस्तियां रहीं मौजूद
वाराणसी। प्रख्यात साहित्यकार पद्मश्री मनु शर्मा की साहित्यिक विरासत, रचनात्मक योगदान और वैचारिक चेतना को समर्पित ‘हमारे मनु’ समारोह का आयोजन बुधवार को रुद्राक्ष इंटरनेशनल सेंटर, सिगरा में किया गया। समारोह में मनु शर्मा की तीन पुनर्प्रकाशित पुस्तकों ‘तीन प्रश्न’, ‘राणा सांगा’ और ‘के बोले माँ तुम अबले’ का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती का सान्निध्य एवं आशीर्वचन प्राप्त हुआ।

समारोह में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष रामबहादुर राय सहित अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य मनु शर्मा की साहित्यिक साधना को सम्मान देने के साथ उनकी रचनाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और साहित्य, इतिहास तथा भारतीय संस्कृति के प्रति अध्ययन एवं चिंतन की भावना को प्रोत्साहित करना रहा।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने अपने संबोधन में कहा कि पद्मश्री मनु शर्मा हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं। उनका जीवन साहित्य-साधना, संघर्ष और सृजन के प्रति अटूट समर्पण की प्रेरक गाथा है। उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और मानवीय संवेदनाओं को प्रभावशाली अभिव्यक्ति दी। श्रीकृष्ण, कर्ण, द्रौपदी और द्रोण जैसे पात्रों के माध्यम से उन्होंने जीवन के द्वंद्व, धर्म की सूक्ष्मता और कर्तव्य की गरिमा को जीवंत किया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि पुस्तकें जीवन-यात्रा की मौन सहयात्री हैं। वे केवल ज्ञान नहीं देतीं, बल्कि चेतना जगाती हैं, दृष्टिकोण बदलती हैं और व्यक्तित्व का निर्माण करती हैं। रामायण मर्यादा, भगवद्गीता कर्तव्यबोध और उपनिषद आत्मबोध का मार्ग दिखाते हैं। जब पुस्तकों से प्राप्त विचार आचरण का हिस्सा बनते हैं, तभी व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के निर्माण में उनका वास्तविक योगदान सामने आता है।
उन्होंने आह्वान किया कि पुस्तकों को केवल अलमारी की शोभा बनाने के बजाय जीवन का हिस्सा बनाया जाए। पढ़ने, विचार करने और सीखी गई बातों को व्यवहार में उतारने से ही साहित्य के प्रति सच्चा सम्मान प्रकट होता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और पद्मश्री मनु शर्मा के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। अतिथियों का पुस्तक-संचय, पुष्पगुच्छ और शॉल भेंट कर स्वागत किया गया। प्रभात कुमार ने अतिथियों का अभिनंदन किया। इस दौरान मनु शर्मा के जीवन, साहित्यिक यात्रा और योगदान पर केंद्रित विशेष फिल्म भी प्रदर्शित की गई।
हेमंत शर्मा ने ‘हमारे मनु’ की संकल्पना पर विचार प्रस्तुत किए, जबकि पाणिनि आनंद ने तीनों पुस्तकों की विषयवस्तु और विशेषताओं से परिचित कराया। सुश्री ईशानी शर्मा द्वारा संचालित न्यास के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया। समारोह की अध्यक्षता कर रहे रामबहादुर राय ने अध्यक्षीय उद्बोधन दिया।
‘हमारे मनु’ समारोह साहित्य और समाज के बीच संवाद स्थापित करने के साथ हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर बना। मनु शर्मा की पुस्तकों के पुनर्प्रकाशन को साहित्यिक धरोहर के संरक्षण और पाठकों को इतिहास, संस्कृति तथा मानवीय संवेदनाओं से जोड़ने की दिशा में उल्लेखनीय पहल के रूप में देखा गया।
समारोह का समापन राष्ट्रगान और पद्मश्री डॉ. सोमा घोष की गायन प्रस्तुति के साथ हुआ।

