गैरसैंण विधानसभा सत्र के नाम पर सरकारी सैर-सपाटा, जनता के करोड़ों रुपये बर्बाद: मोहित डिमरी
डेढ़ दिन में सत्र समेटने पर उठाए सवाल, 7,000 करोड़ रुपये से अधिक का अनुपूरक बजट और 10 कानून बिना पर्याप्त चर्चा के पारित करने का आरोप
देहरादून। मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति के संस्थापक संयोजक मोहित डिमरी ने भराड़ीसैंण (गैरसैंण) में आयोजित विधानसभा सत्र को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि गैरसैंण में विधानसभा सत्र के नाम पर जनता के करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन जनहित के मुद्दों पर गंभीर चर्चा करने के बजाय सरकार ने महज डेढ़ दिन में सत्र समेट दिया।

मोहित डिमरी ने कहा कि मंत्रियों के काफिलों, भारी पुलिस बल की तैनाती और अन्य व्यवस्थाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। इसके बावजूद सदन में जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो सकी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार की ओर से इतने बड़े स्तर पर संसाधन खर्च किए गए, तो सत्र को पर्याप्त समय क्यों नहीं दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि 7,000 करोड़ रुपये से अधिक का अनुपूरक बजट और 10 बड़े कानून बिना पर्याप्त बहस के जल्दबाजी में पारित किए गए। डिमरी ने कहा कि जनता के धन के उपयोग और महत्वपूर्ण कानूनों पर सार्थक चर्चा का अवसर नहीं देना लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के विपरीत है।
विधानसभा सत्र के दौरान प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों पर पानी की बौछारें छोड़ने और लाठीचार्ज किए जाने की भी उन्होंने निंदा की। डिमरी ने कहा कि अपने अधिकारों और जनहित के मुद्दों को लेकर आवाज उठाने वाले युवाओं के साथ ऐसा व्यवहार सरकार की असंवेदनशीलता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि गैरसैंण केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि उत्तराखंड की आत्मा और राज्य आंदोलन के शहीदों के सपनों का प्रतीक है। गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने के बावजूद वहां विधानसभा सत्र को गंभीरता से संचालित नहीं करना पहाड़ की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है।
मोहित डिमरी ने मांग की कि गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित होने पर उसे कम से कम पूरे सप्ताह तक चलाया जाए, ताकि जनता से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हो सके। उन्होंने कहा कि सरकार को गैरसैंण में केवल औपचारिकता निभाने के बजाय पहाड़ की जनता के प्रति अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए।

