पौड़ी

पौड़ी और श्रीनगर के विद्यालयों में बच्चों को किया जागरूक, बाल अधिकारों और सुरक्षा कानूनों की दी जानकारी

पौड़ी गढ़वाल। जनपद पौड़ी के पौड़ी और श्रीनगर स्थित विद्यालयों में बुधवार को ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ के तहत विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किए गए। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से आयोजित इन शिविरों में विद्यार्थियों को बाल अधिकारों, बाल शोषण की रोकथाम, व्यक्तिगत सुरक्षा और निःशुल्क विधिक सहायता के बारे में जानकारी दी गई।

पौड़ी स्थित सेंट जेम्स स्कूल में सिविल जज (कनिष्ठ खंड) रिजवान अंसारी और न्यायिक मजिस्ट्रेट अकमल ने विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण, शिक्षा और सम्मानपूर्वक जीवन के अधिकारों के प्रति जागरूक किया। उन्होंने पॉक्सो अधिनियम-2012, अच्छे-बुरे स्पर्श की पहचान और किसी भी प्रकार के शारीरिक, मानसिक अथवा यौन उत्पीड़न की स्थिति में अभिभावकों, शिक्षकों या किसी विश्वसनीय व्यक्ति को जानकारी देने की सलाह दी।

वहीं, श्रीनगर स्थित पीएम श्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं सिविल जज (सीनियर डिवीजन) नाज़िश कलीम ने छात्राओं को बाल संरक्षण कानूनों, व्यक्तिगत सुरक्षा तथा इंटरनेट और सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने छात्राओं से किसी भी अनुचित व्यवहार या शोषण की स्थिति में बिना भय और संकोच के सहायता लेने की अपील की।

शिविरों में विद्यार्थियों को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की बाल हितैषी विधिक सेवाओं और जरूरतमंद बच्चों के लिए उपलब्ध निःशुल्क कानूनी सहायता के बारे में भी बताया गया। कानूनी सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 15100 तथा बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए 1098 पर संपर्क करने की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में सेंट जेम्स स्कूल की प्रधानाचार्या मधुबाला नेगी, उप प्रधानाचार्या श्वेता, अधिवक्ता विनोद कुमार, पुलिस के एएसआई दिनेश गुसाईं, अधिकार मित्र अवतार सिंह, ज्योति रावत और मनोज पाल सहित अन्य लोग मौजूद रहे। वहीं, पीएम श्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या मीना गैरोला, रिटेनर अधिवक्ता गजेन्द्र सिंह रावत तथा अधिकार मित्र रोशनी रतूड़ी, प्रकाश नेगी और मानव सिंह बिष्ट सहित शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं छात्राएं उपस्थित रहीं।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण का यह राष्ट्रव्यापी अभियान 26 से 31 अक्टूबर तक संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों और कानूनी संरक्षण के प्रति जागरूक कर उनके लिए सुरक्षित एवं भयमुक्त वातावरण सुनिश्चित करना है।

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