परमार्थ निकेतन के नवरात्रि रिट्रीट में 9 देशों के 70 से अधिक साधकों ने किया सहभाग
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में आयोजित नवरात्रि रिट्रीट में विश्व के विभिन्न देशों से आए 70 से अधिक साधकों ने सहभाग किया। माँ गंगा के पावन तट पर आयोजित इस रिट्रीट में प्रतिभागियों ने भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा, योग, ध्यान और आध्यात्मिक जीवन-दर्शन को करीब से जाना। पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और साध्वी भगवती सरस्वती जी के सान्निध्य में साधकों ने नवरात्रि के आध्यात्मिक महत्त्व को समझते हुए आत्मचिंतन और साधना का अनुभव किया।

परमार्थ निकेतन में नवरात्रि के दौरान भक्ति, साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण बना रहा। हिमालय की छत्रछाया और माँ गंगा के तट पर मंत्रोच्चार, यज्ञ, सामूहिक प्रार्थना, ध्यान और संध्या गंगा आरती ने प्रतिभागियों को भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर प्रदान किया।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने भारतीय संस्कृति के सार्वभौमिक संदेश ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ को रेखांकित करते हुए विविधताओं के बीच एकता, आपसी संवाद, सहयोग और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता के महत्त्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय आध्यात्मिक परंपरा को मानवता के लिए आंतरिक शांति, सह-अस्तित्व और सद्भाव का प्रेरणास्रोत बताया।
साध्वी भगवती सरस्वती जी के मार्गदर्शन में साधकों ने ध्यान, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक जीवन के महत्त्व को समझा। नवरात्रि में माँ दुर्गा की उपासना और योग-साधना के माध्यम से प्रतिभागियों ने आत्मबल, करुणा, विवेक और सकारात्मक जीवन-दृष्टि का संदेश ग्रहण किया।
रिट्रीट के दौरान योगासन, प्राणायाम, ध्यान, प्रातःकालीन यज्ञ, आध्यात्मिक सत्र, आयुर्वेद पर परिचर्चा, प्रकृति से जुड़ाव, सृजनात्मक कार्यशालाओं, पवित्र हवन, गंगा आरती और कीर्तन सहित विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं। श्री अनिश रंगरेज ने प्रतिभागियों को योग गरबा कराया। गंगा तट पर संध्या आरती का अनुभव साधकों के लिए विशेष आकर्षण रहा। दीपों की रोशनी, मंत्रों की गूंज और सामूहिक प्रार्थना ने वातावरण को आध्यात्मिक रंगों से भर दिया।
इस रिट्रीट में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी, भारत, इजराइल, इटली, मेक्सिको, स्पेन और अमेरिका सहित नौ देशों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों में संतोष बार्ता, शेया अन्ना स्पिरेवका, इंदिरा मिश्रा, क्लाउडिया सेनहेन, झन्ना बोचकारोवा, अंकित शाह, अक्षय महाजन, चिंतन शेट्टी, डॉ. सुरेश चंदर शर्मा, एरेज फेरीम्यूटर, कृति गुप्ता, इंदु पटियाल, नवीनकुमार सिन्हा, प्रिंस नागपाल, राजीव पटोदिया, राम करण मकर, वैभव वर्मा, विनोद कुमार, राजेंद्र गुमानी, अगुस्तिना लूना, इहाली ओर्टेगा पुलिडो, डोमिनिक एलिजाबेथ यानेज डियाज, क्रिस्टिन टॉम्पकिन्स, रॉबिन जे. क्रीच और सुजाना डेटन सहित अन्य साधक शामिल रहे।
परमार्थ निकेतन का यह आयोजन भारतीय संस्कृति, योग, ध्यान, सेवा, भक्ति और सह-अस्तित्व की परंपरा को वैश्विक स्तर पर जोड़ने का माध्यम बना। रिट्रीट में शामिल साधकों ने भारतीय आध्यात्मिक जीवन-दर्शन को समझने के साथ शांति, आत्मबोध, प्रकृति के सम्मान और मानवता को एक परिवार मानकर जीवन जीने की प्रेरणा प्राप्त की।

