देहरादून

अंकिता को न्याय की मांग पर उबाल, देहरादून में प्रदर्शनकारियों ने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का पुतला फूंका

# बंगाली कोठी चौक पर ‘कलियुगी रावणों’ का पुतला दहन, पुलिस ने छीना तो दूसरा पुतला फूंककर जताया विरोध

देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग और कथित वीआईपी दुष्यंत गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति रद्द करने की मांग को लेकर मंगलवार शाम करीब छह बजे देहरादून के बंगाली कोठी चौक पर आंदोलनकारियों ने प्रदर्शन शुरू किया। इस दौरान भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का पुतला दहन कर विरोध जताया गया। प्रदर्शनकारियों ने पुतले को ‘कलियुग के रावणों’ का प्रतीक बताते हुए नारेबाजी की। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा और पुलिस तथा आंदोलनकारियों के बीच कई बार तीखी नोकझोंक हुई।

बंगाली कोठी चौक पर एकत्रित आंदोलनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, दुष्यंत गौतम और अजय कुमार के नाम लेकर विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के बजाय उसे बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई बार आंदोलनकारियों से पोस्टर और पुतला छीनने का प्रयास किया। एक बार उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी शहीद गिरीश भद्री स्मारक के पास पुतले में आग लगा दी गई, लेकिन पुलिसकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए आग बुझा दी। इसके बाद एक आंदोलनकारी लंबे डंडे पर पोस्टर लगाकर पहुंचा, जिसे भी पुलिस ने छीन लिया। हालांकि, आंदोलनकारियों ने हार नहीं मानी और दूसरा पुतला लेकर पहुंचे तथा उसका दहन कर अपना विरोध जारी रखा।

प्रदर्शन में शामिल सुजाता पॉल ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उत्तराखंड पुलिस सरकार की नहीं, बल्कि भाजपा की पुलिस बनकर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने वाले लोगों को रोका जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक दुष्यंत गौतम को राज्यपाल पद से नहीं हटाया जाता, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे।

मोहित डिमरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी को सीबीआई जांच के दायरे से बाहर रखने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाया कि अंकिता को न्याय दिलाने और कथित वीआईपी की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग के बावजूद मामले में पारदर्शिता क्यों नहीं दिखाई जा रही है। उन्होंने दुष्यंत गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति रद्द करने और मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान बंगाली कोठी चौक पर पुलिस बल तैनात रहा। आंदोलनकारियों और पुलिस के बीच पोस्टर तथा पुतला छीनने को लेकर कई बार नोकझोंक हुई। प्रदर्शन में मोहित डिमरी, सुजाता पॉल, देवेंद्र नौडियाल समेत कई आंदोलनकारी शामिल रहे। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने, कथित वीआईपी की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने और दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रद्द करने की मांग को लेकर उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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