गंगोत्री धाम से स्वच्छता, सेवा और तीर्थों की दिव्यता का संदेश
स्वामी चिदानंद सरस्वती और साध्वी भगवती सरस्वती ने किए मां गंगा के दर्शन, स्वच्छता अभियान चलाकर दिया प्लास्टिक मुक्त तीर्थों का संदेश
गंगोत्री। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर परमार्थ पीठाधीश्वर स्वामी चिदानंद सरस्वती और डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती ने गंगोत्री धाम पहुंचकर मां गंगा के दर्शन किए। इस अवसर पर स्वामी चिदानंद सरस्वती के सान्निध्य एवं नेतृत्व में स्वच्छता अभियान चलाया गया। परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमारों, आचार्यों और परमार्थ परिवार के सदस्यों ने गंगोत्री धाम में स्वच्छता अभियान में सहभागिता की।

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि गंगोत्री केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक चेतना का जीवंत केंद्र है। मां गंगा भारतीय संस्कृति, श्रद्धा और आस्था की अविरल धारा हैं। ऐसे में गंगा तट और तीर्थों की स्वच्छता केवल पर्यावरण संरक्षण का विषय नहीं, बल्कि आस्था के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है।
उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने स्वच्छता को जीवन का अभिन्न संस्कार माना। गंगोत्री और मां गंगा की पावन भूमि पर स्वच्छता अभियान के माध्यम से उनके विचारों को सेवा के रूप में आगे बढ़ाना सच्ची श्रद्धांजलि है।
प्लास्टिक मुक्त तीर्थों का आह्वान
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने गंगोत्री से सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त गंगोत्री, प्लास्टिक मुक्त उत्तराखंड और प्लास्टिक मुक्त तीर्थों का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तीर्थों में केवल दर्शन करने के साथ उनकी सेवा और पवित्रता बनाए रखने का संकल्प भी लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मां गंगा के दर्शन के बाद उनके तट पर प्लास्टिक छोड़कर लौटना श्रद्धा की भावना के अनुरूप नहीं है। सच्ची श्रद्धा वही है जो आस्था को आचरण और पूजा को प्रकृति संरक्षण से जोड़ती है।
इस अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उनके सत्य, अहिंसा, सादगी, साहस, कर्तव्य और राष्ट्रसेवा के आदर्शों को याद किया गया।
“एक पेड़ मां के नाम, एक पेड़ धरती मां के नाम”
कार्यक्रम के दौरान “एक पेड़ मां के नाम—एक पेड़ धरती मां के नाम” का संकल्प भी लिया गया। पर्यावरण संरक्षण और हिमालय की हरियाली को बढ़ावा देने का संदेश देते हुए पौधरोपण किया गया।
कैप्टन स्मित मच्छार के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना
परमार्थ निकेतन की ओर से संकट की घड़ी में साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देने वाले फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मच्छार के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए भी प्रार्थना की गई। इस अवसर की परमार्थ गंगा आरती उन्हें समर्पित की गई।
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि हिमालय धैर्य, मां गंगा प्रवाह और हनुमान जी साहस का संदेश देते हैं। भारतीय संस्कृति सेवा को जीवन का धर्म मानने की प्रेरणा देती है।
गंगोत्री की पावन धरती से उन्होंने तीर्थयात्रियों से आह्वान किया कि तीर्थ केवल दर्शन करने का स्थान नहीं, बल्कि उनकी पवित्रता और प्रकृति की रक्षा करने की जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि जहां प्रकृति हो वहां संरक्षण, जहां समाज हो वहां सेवा और जहां भारत हो वहां राष्ट्र प्रथम का भाव होना चाहिए।
