दिल्ली

जंतर-मंतर पर अनुमति न मिलने पर प्रेस क्लब में श्रद्धांजलि सभा, आंदोलनकारियों ने उठाया न्याय का मुद्दा

नई दिल्ली। रामपुर तिराहा कांड की 32वीं बरसी पर उत्तराखण्ड आंदोलनकारी संगठनों की समन्वय समिति की ओर से दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के सभागार में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। आयोजक देव सिंह रावत ने कहा कि पिछले 32 वर्षों से उत्तराखण्डी 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर काला दिवस मनाते आ रहे हैं, लेकिन इस वर्ष दिल्ली पुलिस द्वारा धरने की अनुमति नहीं दिए जाने से आंदोलनकारियों में रोष है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए इसकी कड़ी भर्त्सना की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के राष्ट्रीय सह-संयोजक एवं उत्तरांचल प्रदेश संघर्ष समिति के पूर्व महामंत्री वरिष्ठ आंदोलनकारी जगदीश ममगांई ने की। सभा में मृत आंदोलनकारियों की आत्मा की शांति के लिए मौन रखा गया तथा दोषियों को न्याय दिलाने की मांग को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को ज्ञापन भेजा गया।

सभा को उत्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा के खुशहाल बिष्ट, उत्तराखण्ड महासभा के हरिपाल रावत एवं अनिल पंत, जनमोर्चा के बृजमोहन सेमवाल, उत्तराखण्ड राज्य लोकमंच के शिव प्रसाद बलूणी, भाजपा नेता विजय सती, डॉ. हरपाल नेगी, पत्रकार एवं वरिष्ठ आंदोलनकारी सुरेश नौटियाल और पत्रकार कुशाल जीना सहित अन्य लोगों ने संबोधित किया।

दोषियों को सजा न मिलने पर उठे सवाल

वरिष्ठ आंदोलनकारी जगदीश ममगांई ने रामपुर तिराहा कांड में लंबे समय से न्याय न मिलने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विभिन्न जांच और न्यायिक प्रक्रियाओं में जिन अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे, उनके विरुद्ध कार्रवाई अपेक्षित गति से नहीं हो सकी। उन्होंने इसे “JUSTICE DENIED” बताते हुए कहा कि आंदोलनकारियों की हत्या और महिलाओं के साथ हुई घटनाओं के पीड़ित परिवार आज भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

ममगांई ने तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका, अभियोजन की प्रक्रिया और बाद में हुई नियुक्तियों व पदोन्नतियों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि रामपुर तिराहा कांड सहित उत्तराखण्ड आंदोलन से जुड़े अन्य गोलीकांडों की निष्पक्ष जांच और दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए।

रामपुर तिराहा कांड से जुड़े मामलों में सीबीआई जांच और विभिन्न अदालतों में चली कानूनी प्रक्रिया का उल्लेख सार्वजनिक रिकॉर्ड में भी मिलता है। 2026 में नैनीताल हाईकोर्ट ने पूर्व जिलाधिकारी अनंत कुमार से जुड़े मामले की स्थिति पर सीबीआई से जानकारी मांगी थी।

सभी सरकारों पर आंदोलनकारियों ने उठाए सवाल

संयोजक देव सिंह रावत ने आरोप लगाया कि वर्ष 1994 से अब तक केंद्र और उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखण्ड की विभिन्न सरकारों ने रामपुर तिराहा कांड सहित आंदोलन के अन्य घटनाक्रमों के दोषियों को न्याय दिलाने के लिए अपेक्षित प्रयास नहीं किए।

उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों ने विभिन्न राजनीतिक दलों और सरकारों से न्याय की मांग की, लेकिन उनकी अपेक्षाएं पूरी नहीं हुईं। इस दौरान वक्ताओं ने पूर्व मुख्यमंत्रियों और वर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित विभिन्न राजनीतिक नेतृत्व पर भी उत्तराखण्ड आंदोलनकारियों से किए गए वादों को पूरा न करने के आरोप लगाए।

वक्ताओं ने कहा कि रामपुर तिराहा कांड उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के इतिहास का एक अत्यंत पीड़ादायक अध्याय है, जिसकी स्मृति हर वर्ष 2 अक्टूबर को शहीदों को श्रद्धांजलि देकर जीवित रखी जाती है। 2026 में भी रामपुर तिराहा शहीद स्थल पर 32वीं बरसी के अवसर पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित हुआ।

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