श्री गुरु ग्रंथ साहिब प्रकाश पर्व: स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने दिया एकत्व, सेवा और मानवता का संदेश
ऋषिकेश। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के प्रकाश पर्व के शुभ अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए भारत की विविधता में निहित एकता और समृद्ध ज्ञानपरंपरा को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि गुरुवाणी, वेद, उपनिषद, गीता, जैन आगम और बौद्ध त्रिपिटक किसी एक पंथ या समुदाय की संपत्ति नहीं, बल्कि समूची मानवता के लिए भारत का अमूल्य आध्यात्मिक उपहार हैं।

भारत की वास्तविक शक्ति: विविधता में एकता
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि भारत की पहचान केवल उसकी प्राचीन सभ्यता से नहीं, बल्कि उस विराट ज्ञान-चेतना से है जिसने जीवन के सबसे गहरे प्रश्नों पर चिंतन किया है।
ज्ञानाभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: भारत ने कभी सत्य को एक दिशा में सीमित नहीं किया। यहां प्रश्न पूछने की स्वतंत्रता और अनुभूति की गहराई दोनों मौजूद हैं।
विभिन्न धाराओं का संगम: वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, गीता के साथ-साथ जैन, बौद्ध और सिख गुरु परंपराएं मिलकर एक ऐसी ज्ञान-गंगा का निर्माण करती हैं, जिसका अंतिम उद्देश्य मानवता का कल्याण है।
गुरुवाणी का संदेश: गुरु ग्रंथ साहिब में संकलित वाणी समाज को नाम-स्मरण, सेवा, समता, नम्रता और एकत्व की राह दिखाती है।
वैश्विक संकटों का समाधान है भारतीय दर्शन
स्वामी जी ने ध्यान दिलाया कि आज जब पूरा विश्व मानसिक अशांति, पर्यावरणीय संकट, हिंसा और असहिष्णुता से जूझ रहा है, तब भारतीय ज्ञानपरंपरा को केवल इतिहास के अध्याय के रूप में देखने के बजाय व्यावहारिक समाधान के रूप में अपनाने की आवश्यकता है।
“भारत की आध्यात्मिक परंपरा एक विराट ज्ञान-गंगा है… योग हमें स्वयं से जोड़ता है, गीता कर्तव्य का बोध कराती है और गुरु परंपरा सेवा व समता की प्रेरणा देती है।”
— स्वामी चिदानन्द सरस्वती
युवा पीढ़ी से ज्ञान को आचरण में ढालने का आह्वान
उन्होंने नई पीढ़ी से आग्रह किया कि वे अपने प्राचीन ग्रंथों और संत-वाणी के मूल संदेश को समझें और उसे आधुनिक जीवन की चुनौतियों के संदर्भ में आत्मसात करें।
पूजा नहीं, आचरण: ज्ञानपरंपरा को केवल पूजने या उद्धृत करने के बजाय जीवन में उतारना आवश्यक है।
विश्व कल्याण का मार्ग: जब ज्ञान आचरण बनता है, तब संस्कृति जीवंत होती है और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ तथा ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भावना साकार होती है।
