साक्षरता केवल पढ़ने-लिखने का ज्ञान नहीं, अधिकारों और कर्तव्यों की समझ भी: परमार्थ निकेतन
ऋषिकेश। अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन ने बच्चों की शिक्षा के साथ उनकी सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार को लेकर जागरूकता का संदेश दिया। निकेतन की ओर से बालक-बालिकाओं, युवाओं, शिक्षकों, अभिभावकों और समाज के सभी जागरूक नागरिकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा गया कि साक्षरता केवल अक्षरों को पहचानने, शब्द पढ़ने या हस्ताक्षर करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को अपने अधिकारों को समझने, कर्तव्यों का निर्वहन करने और आत्मविश्वास के साथ जीवन जीने की शक्ति प्रदान करती है।

परमार्थ निकेतन ने कहा कि विद्या जीवन का प्रकाश है। शिक्षा व्यक्ति को ज्ञानवान बनाने के साथ-साथ विवेकवान, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनाने का माध्यम है। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ज्ञान के साथ संस्कार, अधिकारों के साथ कर्तव्य और प्रगति के साथ करुणा से युक्त समाज का निर्माण करना होना चाहिए।
निकेतन ने कहा कि आज भी अनेक बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित हैं। आर्थिक कठिनाइयों, विद्यालयों तक पहुंच की कमी, डिजिटल संसाधनों के अभाव और सामाजिक परिस्थितियों के कारण बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती है। कई परिवारों में बालिकाओं की शिक्षा को लेकर असमान सोच भी चुनौती बनी हुई है। वहीं कुछ बच्चे श्रम, पारिवारिक जिम्मेदारियों या अन्य परिस्थितियों के कारण विद्यालय छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं।
शिक्षा के साथ बच्चों की सुरक्षा भी जरूरी
परमार्थ निकेतन ने कहा कि शिक्षा का वातावरण तभी सार्थक हो सकता है, जब प्रत्येक बालक-बालिका विद्यालय, छात्रावास, गुरुकुल और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षित, सम्मानपूर्ण और भयमुक्त वातावरण महसूस करे। बच्चों को हिंसा, शोषण, भेदभाव, उपेक्षा और भय से मुक्त वातावरण में शिक्षा का अवसर मिलना चाहिए।
कहा गया कि शिक्षा और सुरक्षा एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। ज्ञान का प्रकाश जहां अज्ञान के अंधकार को दूर करता है, वहीं सुरक्षित वातावरण बच्चों के भीतर से भय को दूर कर आत्मविश्वास पैदा करता है। इसलिए शैक्षणिक संस्थानों को पाठ्यक्रम और परीक्षाओं के साथ बच्चों के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक कल्याण को भी प्राथमिकता देनी चाहिए।
परिवार, विद्यालय और समाज को मिलकर करना होगा काम
परमार्थ निकेतन के अनुसार शिक्षा से जुड़ी चुनौतियों का समाधान केवल सरकारी योजनाओं या विद्यालयों की संख्या बढ़ाने से संभव नहीं है। इसके लिए परिवार, विद्यालय, समाज, प्रशासन और स्वयंसेवी संस्थाओं को मिलकर समग्र दृष्टिकोण अपनाना होगा।
विद्यालयों में बच्चों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ सत्य, अहिंसा, करुणा, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, अनुशासन और सेवा के संस्कार दिए जाने चाहिए। बच्चों को प्रश्न पूछने, विचार करने, सही निर्णय लेने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।
सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण के लिए विद्यालयों और छात्रावासों में सुरक्षा मानकों का नियमित निरीक्षण, भवनों एवं विद्युत व्यवस्था की जांच, अग्नि सुरक्षा, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छ शौचालय और आपातकालीन व्यवस्थाओं को मजबूत किया जाना जरूरी है।
परमार्थ निकेतन ने कहा कि बच्चों को केवल सफल बनने की नहीं, बल्कि सार्थक जीवन जीने की शिक्षा देने की आवश्यकता है। उन्हें प्रकृति से प्रेम, जल संरक्षण, समाज के कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता और अपने ज्ञान का उपयोग लोककल्याण के लिए करने की प्रेरणा दी जानी चाहिए।
अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर सभी से शिक्षा के अधिकार, बच्चों की सुरक्षा और मानव गरिमा की रक्षा के लिए संकल्प लेने का आह्वान किया गया।
