पौड़ी

परमार्थ निकेतन में मलूक पीठाधीश्वर स्वामी राजेन्द्र दास का आगमन, ‘गो सम्मान आह्वान अभियान’ का शुभारंभ

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में मंगलवार को आध्यात्मिकता, राष्ट्रचेतना और सनातन संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। मलूक पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी श्री राजेन्द्र दास जी महाराज ने परमार्थ निकेतन पहुंचकर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज से आत्मीय भेंट की। इस दौरान दोनों संतों ने सनातन संस्कृति, भारतीय जीवन-मूल्यों, गौ संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य पर विचार-विमर्श किया।

इस अवसर पर ‘गो सम्मान आह्वान अभियान’ का शुभारंभ किया गया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि यह अभियान केवल गौ संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, प्राकृतिक कृषि, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय संवेदनाओं को सशक्त बनाने का माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि गौ भारतीय संस्कृति, प्रकृति और करुणा की जीवंत अभिव्यक्ति है तथा प्रकृति और संस्कृति का संरक्षण साथ-साथ चलने पर ही मानवता का भविष्य सुरक्षित रह सकता है।

स्वामी राजेन्द्र दास जी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि गौ संरक्षण किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि अभियान के प्रमुख उद्देश्यों में देशभर में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध, देसी गोवंश का संरक्षण एवं संवर्धन, गौ आधारित प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा, चारा सुरक्षा नीति, पंचगव्य उत्पादों को प्रोत्साहन तथा शिक्षा में भारतीय जीवन-दर्शन और गौ महात्म्य को शामिल करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान विरोध का नहीं, बल्कि जनजागरण, सेवा, संवेदना और जनभागीदारी का अभियान है।

कार्यक्रम के दौरान स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने स्वामी राजेन्द्र दास जी महाराज को रुद्राक्ष का पौधा भेंट कर उनका अभिनंदन किया और कहा कि उनका जीवन सेवा, आध्यात्मिकता, राष्ट्रभक्ति और मानवता के उच्च आदर्शों का प्रतीक है।

इस अवसर पर चंद्रयान-3 के सफल प्रक्षेपण की वर्षगांठ भी मनाई गई। दोनों संतों ने भारत के वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियां और उसकी आध्यात्मिक चेतना एक-दूसरे की पूरक हैं। परमार्थ निकेतन की सायंकालीन गंगा आरती चंद्रयान-3 मिशन की सफलता और देश के वैज्ञानिकों के सम्मान को समर्पित रही। माँ गंगा के तट से भारत की वैज्ञानिक प्रगति, नवाचार, आत्मनिर्भरता और विश्वकल्याण के लिए विशेष प्रार्थना की गई।

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