गोल्डन आवर में समय पर मदद से बच सकती है जान: नाज़िश कलीम
पौड़ी। सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से जिला न्यायालय परिसर पौड़ी में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं परिवहन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिविल जज एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नाज़िश कलीम ने कहा कि सड़क दुर्घटना के बाद का पहला घंटा “गोल्डन आवर” कहलाता है। इस दौरान घायल व्यक्ति को त्वरित चिकित्सा सहायता मिलने पर उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। उन्होंने नागरिकों से दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने और यातायात नियमों का पालन करने की अपील की।

संभागीय परिवहन अधिकारी विमल पाण्डेय ने सड़क सुरक्षा, यातायात नियमों, प्राथमिक उपचार, सीपीआर तथा गुड सेमेरिटन कानून से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। उन्होंने बताया कि दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने वाले नागरिकों को कानून द्वारा संरक्षण प्रदान किया गया है।
शिविर के दौरान पैरालीगल वालंटियर्स एवं अधिकार मित्रों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से हेलमेट और सीट बेल्ट के उपयोग, नशे में वाहन न चलाने तथा सड़क दुर्घटना पीड़ितों की सहायता करने का संदेश दिया। इस अवसर पर परिवहन विभाग द्वारा प्रतिभागियों को हेलमेट और फर्स्ट एड बॉक्स भी वितरित किए गए।
कार्यक्रम में एआरटीओ मंगल सिंह, प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. अलीशा सचदेवा, चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल कमल प्रसाद बमराड़ा, असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल विनोद कुमार, डिप्टी लीगल एड डिफेंस काउंसिल महेश बलूनी, अधिवक्ता गजेन्द्र सिंह रावत, आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों सहित कई लोग उपस्थित रहे।
