सैंजी गांव में लौटी उम्मीदें, प्रभावित परिवारों को मिला नया आशियाना
पौड़ी। जनपद पौड़ी गढ़वाल के सैंजी गांव में पिछले वर्ष 6 अगस्त को आई भीषण आपदा के बाद बेघर हुए परिवारों के जीवन में अब फिर से उम्मीदें लौटने लगी हैं। भूस्खलन और मूसलाधार बारिश से गांव के कई मकान ध्वस्त हो गए थे, जिससे 16 परिवार प्रभावित हुए थे। इनमें सात परिवार ऐसे थे जिनका पूरा घर और जमीन तक तबाह हो गई थी।

आपदा के तुरंत बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं गांव पहुंचे थे और प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर राहत एवं पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया था कि सरकार संकट की इस घड़ी में हर प्रभावित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देहरादून में आपदा प्रभावितों से मुलाकात कर उनका हाल जाना था।
मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में सरकार और जिला प्रशासन ने राहत एवं पुनर्वास कार्यों को प्राथमिकता देते हुए तेजी से कार्रवाई की। सभी 16 प्रभावित परिवारों को मुख्यमंत्री राहत कोष से पांच-पांच लाख रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराई गई। इसके अलावा जिन सात परिवारों की भूमि पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी, उन्हें एसडीआरएफ के विस्थापन मद से 4.25 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता प्रदान की गई।
सरकारी सहायता के परिणामस्वरूप अब प्रभावित परिवारों के नए मकान तैयार हो चुके हैं और उनका पुनर्वास सुनिश्चित किया गया है। जिला प्रशासन की ओर से प्रभावितों को अस्थायी आश्रय, भोजन, चिकित्सा सुविधा और अन्य आवश्यक सहायता भी समय पर उपलब्ध कराई गई।
आपदा प्रभावित नीलम सिंह भंडारी ने बताया कि आपदा के बाद उनका परिवार लंबे समय तक अस्पताल और अस्थायी आश्रय में रहा, लेकिन अब नया घर बनने से उन्हें दोबारा सामान्य जीवन शुरू करने का सहारा मिला है। वहीं बबीता देवी ने कहा कि आपदा में उनका पूरा सामान नष्ट हो गया था और उन्हें उम्मीद नहीं थी कि इतनी जल्दी घर दोबारा बन पाएगा, लेकिन सरकार की सहायता से अब उनका परिवार सुरक्षित माहौल में रह रहा है।
जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप प्रशासन ने संवेदनशीलता और तत्परता के साथ राहत एवं पुनर्वास कार्य किए। सरकार की प्राथमिकता रही कि प्रभावित परिवारों को जल्द से जल्द सुरक्षित आवास और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे सम्मानपूर्वक अपना जीवन फिर से शुरू कर सकें।
