12 साल बाद भी अधूरा चिरबटिया कृषि महाविद्यालय, करोड़ों की इमारतें बनी खंडहर
रुद्रप्रयाग। रुद्रप्रयाग और टिहरी जिले की सीमा पर स्थित चिरबटिया कृषि महाविद्यालय का भवन निर्माण कार्य 12 वर्ष बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित भवन आज देखरेख के अभाव और कथित घटिया निर्माण के कारण खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। स्थिति यह है कि महाविद्यालय की कक्षाएं अब भी टिहरी जिले के रानीचौरी परिसर में संचालित की जा रही हैं।

हाल ही में रुद्रप्रयाग विधानसभा से पूर्व विधायक प्रत्याशी एवं युवा नेता मोहित डिमरी ने चिरबटिया पहुंचकर निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया और इसे शासन-प्रशासन की गंभीर लापरवाही बताया।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2013 में चिरबटिया में कृषि महाविद्यालय की स्थापना को स्वीकृति मिली थी। इसके लिए उद्यान विभाग की लगभग 8.3 हेक्टेयर भूमि महाविद्यालय के लिए आवंटित की गई थी। तत्कालीन सरकार ने भवन निर्माण हेतु ₹25 करोड़ का बजट स्वीकृत किया था, जिसमें प्रथम चरण में ₹5 करोड़ जारी किए गए। निर्माण कार्य की जिम्मेदारी टेंडर प्रक्रिया के तहत उत्तर प्रदेश निर्माण निगम को सौंपी गई थी।
कार्यदायी संस्था द्वारा टाइप-2 एवं टाइप-3 आवासों सहित मुख्य भवन का ढांचा तैयार किया गया, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कई भवन जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं और परिसर लावारिस स्थिति में पड़ा हुआ है।
महाविद्यालय का स्थायी परिसर तैयार न होने के कारण छात्रों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यहां कृषि विज्ञान, बागवानी, मृदा विज्ञान, पादप रोग विज्ञान और कीट विज्ञान जैसे विषयों की पढ़ाई के साथ पर्वतीय कृषि अनुसंधान की सुविधा विकसित की जानी थी, लेकिन बुनियादी ढांचे के अभाव में छात्रों की पढ़ाई रानीचौरी परिसर से संचालित की जा रही है।
लंबे इंतजार के बाद अब छात्रावास निर्माण के लिए ₹7.26 करोड़ की धनराशि स्वीकृत हुई है और निर्माण कार्य शुरू किया गया है। हालांकि, इस पर भी सवाल उठने लगे हैं। मोहित डिमरी ने कहा कि यदि पहले की तरह निर्माण कार्यों में गुणवत्ता नहीं रखी गई तो नई इमारतों की स्थिति भी खराब हो सकती है। उन्होंने कहा कि केवल हॉस्टल निर्माण से महाविद्यालय पूरी तरह संचालित नहीं हो सकता, क्योंकि यहां प्रशासनिक भवन, हाई-टेक लैब, एकेडमिक ब्लॉक और शिक्षकों के आवास भी आवश्यक हैं।
उन्होंने आशंका जताई कि टुकड़ों में बजट जारी कर सरकारी धन के दुरुपयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। क्षेत्रीय लोगों ने पुराने जर्जर ढांचे की जांच कर जिम्मेदार कार्यदायी संस्था के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई है।
