राष्ट्रीय खेल दिवस पर मेजर ध्यानचंद जी को श्रद्धांजलि
ऋषिकेश। राष्ट्रीय खेल दिवस पूरे भारत के लिए गर्व का विषय है। यह दिन हॉकी के जादूगर, भारत के गौरव और खेल-जगत के अप्रतिम नायक मेजर ध्यानचंद जी की जयंती को समर्पित है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने इस अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि मेजर ध्यानचंद जी ने अपने असाधारण खेल कौशल, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति से भारतीय हॉकी को स्वर्णिम ऊँचाइयों तक पहुँचाया और पूरे विश्व में भारत का नाम रोशन किया।
उन्होंने कहा कि खेल केवल मैदान तक सीमित नहीं होते, बल्कि जीवन जीने की एक कला और राष्ट्रसेवा का माध्यम भी हैं। उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा है – अनुशासन से बढ़ो, परिश्रम से चमको और राष्ट्रभक्ति से जीवन को सार्थक बनाओ।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि खेल भावना हमें सिखाती है कि जीत और हार दोनों को समान भाव से स्वीकार करना चाहिए। खेल का वास्तविक उद्देश्य केवल पदक जीतना नहीं, बल्कि टीमवर्क, अनुशासन, आत्मविश्वास और एकता का विकास करना है। खिलाड़ी जब मैदान में उतरते हैं, तो वह केवल स्वयं का नहीं, बल्कि पूरे देश का प्रतिनिधित्व करते हैं।
उन्होंने सभी खिलाड़ियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि चाहे ओलंपिक में पदक जीतने वाले हों, अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत का तिरंगा लहराने वाले हों या फिर ग्रामीण अंचल में बच्चों को खेलों के माध्यम से आगे बढ़ाने वाले – हर खिलाड़ी भारत की शक्ति और आशा का प्रतीक है।
स्वामी जी ने आगे कहा कि खेल शरीर को स्वस्थ, मन को संतुलित और आत्मा को प्रफुल्लित करते हैं। योग, ध्यान और खेल का संगम जीवन को शांति और संतुलन प्रदान करता है। आज की दुनिया, जो तनाव और असंतुलन से जूझ रही है, उसके लिए खेल और योग भारतीय संस्कृति के अनमोल उपहार हैं।
उन्होंने स्मरण दिलाया कि मेजर ध्यानचंद जी को “हॉकी का जादूगर” कहा जाता है क्योंकि उनकी प्रतिभा, ईमानदारी, समर्पण और राष्ट्रप्रेम ने उन्हें महान खिलाड़ी बनाया।
राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि खेलों को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का साधन माना जाए। अनुशासन, परिश्रम और समर्पण को जीवन का आधार बनाते हुए खेल संस्कृति को गाँव-गाँव तक पहुँचाने का संकल्प लिया जाए।
