आतंकवाद के विनाश के लिए उत्तराखंड विद्वत्सभा ने किया “समूल आतंक नाशक महायज्ञ” का आयोजन
*पहलगाम में आतंकी हमले में मृत हिंदुओं को दी श्रद्धांजलि*
*रुद्राष्टाध्यायी, दुर्गासप्तशती, नारायण कवचम्, श्रीराम रक्षा स्तोत्र एवं महामृत्युंजय मंत्र का सामूहिक जाप किया गया।*
*वातावरण को शुद्ध व ऊर्जावान बनाने हेतु ताम्र कलश में गंगाजल स्थापना, शंखध्वनि एवं घंटाध्वनि का भी आयोजन*
देहरादून। उत्तराखंड विद्वत्सभा द्वारा आज दर्शन लाल चौक स्थित पंचायती मंदिर में श्री परशुराम जयंती के पावन अवसर पर “विशेष समूल आतंक नाशक महायज्ञ एवं श्रद्धांजलि सभा” का आयोजन किया गया।

सभा के संरक्षक डॉ. रमेश चंद्र पांडेय ने मुख्य अतिथि के रूप में दीप प्रज्वलित पर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। यज्ञ के मुख्य आचार्य पंडित राधाकृष्ण मैठाणी के द्वारा वेदमंत्रों की दिव्य ऋचाओं के माध्यम से यज्ञ पुरुष भगवान से विश्व शांति की कामना की गई।
देवभूमि उत्तराखंड में चारधाम यात्रा निर्विघ्नता और सुरक्षित सम्पन्नता, यात्रा में सम्मिलित श्रद्धालुओं की यात्रा सुखद एवं लाभकारी हो एवं यात्रियों को आध्यात्मिक लाभ प्रात हो, चारधाम यात्रा से उत्तराखंड राज्य में आध्यात्मिक एवं आर्थिक समृद्धि में वृद्धि , भगवान परशुराम जन्मोत्सव को जन जन के लिए प्रेरणास्रोत हो इसके साथ ही पहलगाम आतंकी हमले में मृत हिंदुओं को सामूहिक श्रद्धांजलि दी गई।
विशेष उपस्थिति पूर्व धर्माधिकारी आचार्य जगदम्बा प्रसाद सती जी, प्राचार्य देवी प्रसाद ममगांई जी, डॉ. शम्भू प्रसाद पाण्डेय जी, डॉ. राम भूषण बिजल्वाण जी, डॉ. राम लखन गैरोला जी , पूर्व अध्यक्ष पंडित उदय शंकर भट्ट जी।

महायज्ञ में विशिष्ट विद्वान जनों की सहभागिता रही जिनमें, प्रमुख रूप सभा प्रवक्ता आचार्य मुकेश पंत, आचार्य जमुना प्रसाद पैन्यूली, राकेश रतूड़ी, सुनील शर्मा, शशिबल्लभ पंत, आचार्य विकास भट्ट, विकास नौडियाल, रबिंद्र डंगवाल, भुवनेश्वर थपलियाल, आचार्य राधाकृष्ण मैठाणी, लक्ष्मी प्रसाद पाण्डेय आदि।
महायज्ञ में देशी गाय का शुद्ध घी एवं गोबर गोमूत्र से बना पंचगव्य प्रयोग किया गया साथ ही शुद्ध पंचमेवा, विशेष जड़ी-बूटियाँ एवं चंदन मिश्रित हवन सामग्री का प्रयोग किया गया।
मंत्रोच्चारण में रुद्राष्टाध्यायी, दुर्गासप्तशती, नारायण कवचम्, श्रीराम रक्षा स्तोत्र एवं महामृत्युंजय मंत्र का सामूहिक जाप किया गया। वातावरण को शुद्ध व ऊर्जावान बनाने हेतु ताम्र कलश में गंगाजल स्थापना, शंखध्वनि एवं घंटाध्वनि का भी आयोजन हुआ।
सभा ने आज सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि चारधाम सहित सभी तीर्थ स्थलों पर तीर्थयात्रियों को पंजीकरण करते समय एक शास्त्रसम्मत नियमावली प्रदान की जाएगी, ताकि तीर्थों की महिमा, श्रद्धा एवं गरिमा बनी रहे और उत्तराखंड को आध्यात्मिक व आर्थिक लाभ प्राप्त हो। इस नियमावली के निर्माण का कार्य धर्माधिकारी आचार्य जगदम्बा प्रसाद सती जी एवं संरक्षक मंडल के मार्गदर्शन में शीघ्र आरंभ किया जाएगा।
अध्यक्ष आचार्य विजेंद्र प्रसाद ममगाईं ने सभी उपस्थित विद्वानों, श्रद्धालुओं एवं आयोजन समिति के सदस्यों के प्रति हार्दिक धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन न केवल उत्तराखंड बल्कि सम्पूर्ण भारत के आध्यात्मिक उत्थान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
कार्यक्रम का संचालन सभा के महासचिव आचार्य दिनेश प्रसाद भट्ट ने किया एवं सभा अध्यक्ष आचार्य विजेन्द्र प्रसाद ममगाईं ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
