जिला निरीक्षण समिति ने बाल देखरेख संस्थाओं का किया त्रैमासिक निरीक्षण
पौड़ी। जिला निरीक्षण समिति ने बुधवार को राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर), गड़ोली और राजकीय विशिष्ट दत्तक ग्रहण अभिकरण का त्रैमासिक निरीक्षण किया। समिति ने संस्थाओं में बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, भोजन, स्वच्छता, शिक्षा, खेलकूद और मनोरंजन सहित अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

राजकीय संप्रेक्षण गृह, गड़ोली में निरीक्षण के दौरान पांच विधि-विवादित किशोर निवासरत पाए गए। समिति सदस्यों ने किशोरों से व्यक्तिगत संवाद कर उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं की जानकारी ली। क्रीड़ा कक्ष में टेबल टेनिस टेबल उपलब्ध मिली। समिति ने बच्चों को नियमित खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों में शामिल करने के निर्देश दिए।
मनोरंजन कक्ष एवं पुस्तकालय के निरीक्षण में कक्षा छह से 12 तक की पाठ्य-पुस्तकें उपलब्ध मिलीं। समिति ने बच्चों को अध्ययन और रचनात्मक गतिविधियों के लिए पुस्तकों का अधिकाधिक उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। भवन एवं परिसर के निरीक्षण के दौरान आवश्यक सुदृढ़ीकरण और मरम्मत कार्य कराने का सुझाव दिया गया। समिति सचिव एवं जिला परिवीक्षा अधिकारी अरविंद कुमार ने बताया कि वर्षा ऋतु समाप्त होने के बाद भवन के सुदृढ़ीकरण एवं मरम्मत की कार्रवाई प्राथमिकता से की जाएगी।
बच्चों से भोजन को लेकर उनकी पसंद और रुचि की जानकारी भी ली गई। समिति ने बच्चों की पसंद, स्वास्थ्य और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भोजन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। खाना बनाने में रुचि रखने वाले बच्चों को उचित मार्गदर्शन एवं निगरानी में भोजन तैयार करने का अवसर देने को कहा गया, जिससे उनमें आत्मनिर्भरता और जीवन-कौशल का विकास हो सके।
इसके बाद राजकीय विशिष्ट दत्तक ग्रहण अभिकरण का निरीक्षण किया गया। यहां फिलहाल कोई बच्चा निवासरत नहीं मिला। समिति ने परिसर में साफ-सफाई एवं स्वच्छ वातावरण बनाए रखने पर विशेष जोर देते हुए नियमित स्वच्छता व्यवस्था की निगरानी के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान डॉ. आशीष गुसाईं एवं डॉ. पुनीत भट्ट ने संस्थान में उपलब्ध फर्स्ट एड किट का परीक्षण किया तथा आवश्यक प्राथमिक उपचार सामग्री की उपलब्धता और उपयोगिता का जायजा लिया।
समिति ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देश दिए कि बाल देखरेख संस्थाओं में बच्चों की सुरक्षा, सम्मान, स्वास्थ्य, शिक्षा और समग्र विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। बच्चों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ समझते हुए उनके सर्वोत्तम हित में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
निरीक्षण के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता अरुण खुगसाल, बाल कल्याण समिति की सदस्य गंगोत्री नेगी एवं सुनीता भट्ट तथा संरक्षण अधिकारी सागर लिंगवाल मौजूद रहे।
