सेब बागवानी से बदली सीमांत गांव की तस्वीर, जमरिया के दो किसानों ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी
बीरोंखाल/पौड़ी। उत्तराखंड सरकार द्वारा कृषि एवं उद्यान क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए संचालित योजनाओं का सकारात्मक असर अब पर्वतीय क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। बीरोंखाल विकासखंड के सीमांत गांव जमरिया के दो प्रगतिशील किसान सुरेंद्र सिंह रावत और मंगल सिंह चौधरी आधुनिक सेब बागवानी अपनाकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रहे हैं। दोनों किसान हर वर्ष 4 से 5 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित कर स्थानीय युवाओं के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।

सुरेंद्र सिंह रावत ने वर्ष 2021 में सेब बागवानी की शुरुआत की। वर्तमान में उनके बगीचे में लगभग 1500 फलदार सेब के पौधे हैं। करीब 80 नाली भूमि पर सेब, अन्य फल और मौसमी सब्जियों की खेती के साथ वे मत्स्य पालन और बकरी पालन भी कर रहे हैं। उद्यान विभाग की योजनाओं के तहत ट्रैक्टर, पॉलीहाउस और अन्य सुविधाओं का लाभ मिलने से उनकी खेती अधिक वैज्ञानिक और लाभकारी बनी है।
वहीं, किसान मंगल सिंह चौधरी के बगीचे में भी लगभग 1500 फलदार पौधे हैं तथा 500 नए पौधे तैयार किए गए हैं। आधुनिक तकनीकों और विभागीय प्रशिक्षण का लाभ लेकर वे भी प्रतिवर्ष 4 से 5 लाख रुपये का शुद्ध लाभ कमा रहे हैं। उनके उत्पाद प्रदेश की विभिन्न मंडियों तक पहुंच रहे हैं, जिससे उनकी आय लगातार बढ़ रही है।
जिला उद्यान अधिकारी मनोरंजन सिंह भंडारी ने बताया कि उद्यान विभाग किसानों को उच्च गुणवत्ता के पौधे, तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से निरंतर सहयोग प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि जमरिया गांव के किसान यह साबित कर रहे हैं कि वैज्ञानिक पद्धति और सरकारी योजनाओं के समुचित उपयोग से पर्वतीय क्षेत्रों में भी सेब उत्पादन से अच्छी आय अर्जित की जा सकती है।
उन्होंने किसानों और युवाओं से आधुनिक बागवानी अपनाकर विभागीय योजनाओं का लाभ लेने की अपील की।
