मानसून आपदा से निपटने को तैयार पौड़ी, सात स्थानों पर हुआ व्यापक मॉक अभ्यास
पौड़ी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के अनुपालन में गुरुवार को पौड़ी गढ़वाल में मानसून पूर्व राज्य स्तरीय आपदा मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। जिले के सात संवेदनशील स्थानों पर भूस्खलन, बादल फटना और नदियों के जलस्तर में वृद्धि जैसी काल्पनिक आपदा परिस्थितियां तैयार कर राहत एवं बचाव तंत्र की क्षमता, विभागीय समन्वय और संसाधनों की उपलब्धता का परीक्षण किया गया। पूरे अभ्यास की निगरानी जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने कलेक्ट्रेट स्थित एकीकृत कंट्रोल रूम से की।

मॉक ड्रिल के दौरान सतपुली-गुमखाल मार्ग पर भूस्खलन से सड़क अवरुद्ध होने और 20 से 30 लोगों के फंसे होने का परिदृश्य बनाया गया, जहां राहत दल ने एक घायल को हंस फाउंडेशन अस्पताल पहुंचाया। थलीसैंण में बादल फटने की स्थिति में 25 प्रभावितों का रेस्क्यू, दो मृतकों का पंचनामा और तीन गंभीर घायलों को जिला अस्पताल रेफर करने का अभ्यास किया गया।
कोटद्वार के सिम्बलचौड़ क्षेत्र में सुखरौ नदी का जलस्तर बढ़ने पर 15 से 20 लोगों को सुरक्षित निकाला गया तथा दो घायलों को अस्पताल भेजा गया। श्रीनगर के फरासू में भूस्खलन से राष्ट्रीय राजमार्ग अवरुद्ध होने और 80 से 100 लोगों के फंसे होने की स्थिति में राहत सामग्री पहुंचाई गई, यातायात डायवर्ट किया गया तथा जेसीबी के माध्यम से मार्ग खोलने का अभ्यास किया गया। धारी देवी के समीप गोवा बीच क्षेत्र में अलकनंदा नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच तीन घायलों का रेस्क्यू कर उपचार के लिए भेजा गया।
अल्केश्वर घाट में जलस्तर बढ़ने की स्थिति में तीन घायलों को बेस अस्पताल पहुंचाने और 20 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक ले जाने का अभ्यास किया गया। वहीं लक्ष्मणझूला क्षेत्र में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के परिदृश्य में प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन टीम ने लगभग 2500 लोगों की सुरक्षित निकासी का सफल अभ्यास किया।
मॉक ड्रिल के बाद जिलाधिकारी ने सभी विभागों की तैयारियों की समीक्षा करते हुए आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया, बेहतर समन्वय और आवश्यक सेवाओं की शीघ्र बहाली के निर्देश दिए। उन्होंने ग्राम प्रधानों, महिला मंगल दलों और युवक मंगल दलों की सक्रिय भागीदारी पर भी जोर दिया। साथ ही जेसीबी मशीनों, एंबुलेंस, उपकरणों और अन्य संसाधनों की अद्यतन उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने कहा कि ऐसे मॉक अभ्यास वास्तविक आपदा के समय त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अभ्यास के दौरान चिन्हित कमियों को समयबद्ध ढंग से दूर करने तथा राहत एवं बचाव तंत्र को लगातार मजबूत बनाए रखने के निर्देश भी दिए।
