पौड़ी

मानसून आपदा मॉक ड्रिल: पौड़ी जिले में भूस्खलन, बादल फटने और बाढ़ जैसे हालात का किया गया अभ्यास

पौड़ी। मानसून सीजन के दौरान आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखने के लिए गुरुवार को जनपद पौड़ी में व्यापक मानसून मॉक अभ्यास आयोजित किया गया। अभ्यास के दौरान जिले के विभिन्न स्थानों पर भूस्खलन, बादल फटना, नदी का जलस्तर बढ़ना और सड़क बाधित होने जैसी काल्पनिक आपदा परिस्थितियां बनाई गईं, जिनमें जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग और अन्य एजेंसियों ने समन्वित राहत एवं बचाव अभियान चलाया।

सुबह 9:15 बजे सतपुली में भूस्खलन की सूचना पर 20 से 25 लोगों के फंसे होने का परिदृश्य तैयार किया गया। राहत एवं बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर अभियान शुरू किया। वहीं थलीसैंण में बादल फटने की घटना के तहत 25 लोगों के फंसे होने की सूचना पर जिला प्रशासन, एसडीआरएफ और पुलिस बल तत्काल रवाना हुए। मॉक अभ्यास के दौरान कुल 25 लोगों और 4 मवेशियों का सफल रेस्क्यू किया गया। तीन गंभीर घायलों को 108 एम्बुलेंस से जिला अस्पताल पौड़ी भेजा गया, जबकि एक व्यक्ति की मृत्यु दर्शाते हुए पंचनामा की कार्रवाई का भी अभ्यास किया गया।

कोटद्वार के सिंबलचौड़ में नदी का जलस्तर बढ़ने की स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने का अभ्यास किया गया। यहां 15 से 20 लोगों का रेस्क्यू किया गया तथा दो घायलों को उपचार के लिए कोटद्वार अस्पताल भेजा गया। मौके पर अपर पुलिस अधीक्षक, उपजिलाधिकारी और पुलिस बल मौजूद रहे।

श्रीनगर क्षेत्र के फरासू में भूस्खलन तथा धारी देवी स्थित गोवा बीच के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर जलभराव की स्थिति बनाई गई। यहां पुलिस बल, स्वास्थ्य विभाग और अन्य टीमें मौके पर भेजी गईं। 80 से 100 लोगों के फंसे होने की स्थिति में फूड पैकेट वितरित किए गए तथा एनडीआरएफ की भी मांग की गई। मलबा हटाने के लिए जेसीबी मशीनें लगाई गईं और छांतीखाल तथा खांकरा से यातायात डायवर्ट किया गया।

अलकनंदा नदी का जलस्तर बढ़ने से अलकेश्वर घाट में जलभराव की स्थिति पर भी अभ्यास किया गया। एनडीआरएफ को मौके पर भेजा गया तथा नदी किनारे मौजूद 20 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर हटाया गया। एक घायल को उपचार के लिए भेजने का भी अभ्यास किया गया। नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई।

इस दौरान टीएचडीसी टिहरी की ओर से डेम से पानी छोड़े जाने की सूचना के आधार पर देवप्रयाग, मालाकुंड और लक्ष्मणझूला क्षेत्रों को भी अलर्ट करने का अभ्यास किया गया।

सतपुली-गुमखाल मोटर मार्ग पर भूस्खलन से सड़क बाधित होने की स्थिति में जेसीबी से मार्ग खोलने का सफल प्रदर्शन किया गया तथा एक घायल को हंस फाउंडेशन अस्पताल में भर्ती कराने का अभ्यास भी किया गया।

पूरे मॉक अभ्यास के दौरान जिला आपदा नियंत्रण कक्ष से लगातार सूचनाओं का आदान-प्रदान किया गया और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया तथा राहत एवं बचाव कार्यों की प्रभावशीलता का परीक्षण किया गया।

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